बारिश का कहर, नदी पारा बना टापू
शेल्टर होम में लोगों ने लि सरण
बस्तर के माटी न्यूज़ (BKM NATIONAL NEWS),गरियाबंद
गरियाबंद जिले में पिछले 48 घंटे से हो रही लगातार बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। अमलीपदर ग्राम पंचायत का आश्रित पारा नदीपारा भी बारिश के बाद चारों तरफ से पानी से घिर गया।

करीब 160 ग्रामीणों की आबादी वाले इस पारे का संपर्क मुख्य आबादी से पूरी तरह कट गया। बताया जाता है कि नदी पारा करीब 40 साल से आबाद है, लेकिन इन 40 सालों में यहां घर बदले, पीढ़ियां बदलीं और तकनीक 2G से 5G तक पहुंच गई, लेकिन
नदी पारा तक पहुंचने वाली सड़क आज भी नहीं पहुंच पाई।

सड़क नहीं मिली तो बनी मानव शृंखला
बारिश और तेज बहाव के बीच जब बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं बचा तो पंचायत की टीम ने मोर्चा संभाला।
सड़क के अभाव में ग्रामीणों को पानी से बाहर निकालने के लिए मानव शृंखला बनाई गई। एक-दूसरे का हाथ पकड़कर बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और मासूम बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। यानी विकास की सड़क भले ही नदी पारा तक नहीं पहुंची, लेकिन मुश्किल वक्त में इंसानियत की सड़क जरूर बन गई।
शेल्टर होम बना सहारा, लेकिन सवाल बरकरार
रेस्क्यू के बाद करीब 160 ग्रामीणों को सुरक्षित निकालकर शेल्टर होम पहुंचाया गया, जहां भोजन और पानी की व्यवस्था की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के दिनों में ऐसी स्थिति पहले भी कई बार बन चुकी है। कई बार रात के वक्त भी जान जोखिम में डालकर बाहर निकलना पड़ा है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या हर मानसून के दौरान नदी पारा के लोगों का सहारा सिर्फ राहत शिविर और रेस्क्यू ऑपरेशन ही रहेगा?

कोदो भाटा के दो नालों में कमर तक पानी
बारिश का असर सिर्फ नदीपारा तक सीमित नहीं है। अमलीपदर से जंगल क्षेत्र की ओर जाने वाले रास्ते में कोदोभाटा के पास दो नालों में कमर तक पानी बह रहा है। तेज बहाव के कारण इस मार्ग पर भी आवागमन प्रभावित हुआ है। मुड़गेल माल समेत आसपास के कई इलाकों में सड़कें पानी में डूबी हैं, कच्चे मकानों के क्षतिग्रस्त होने और रास्ते बंद होने की भी स्थिति बनी हुई है।
कोदो भाटा डैम को लेकर ग्रामीणों में चिंता

कोदोभाटा डैम की स्थिति को लेकर भी स्थानीय ग्रामीणों में चिंता है। ग्रामीणों का कहना है कि डैम की हालत खराब है और किसी तरह की क्षति होने पर आसपास के हजारों लोग प्रभावित हो सकते हैं। लगातार बारिश के बीच प्रशासन और पंचायत की टीम राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हुई है। फिलहाल प्राथमिकता लोगों को सुरक्षित रखना है, लेकिन इन इलाकों में स्थायी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल बने हुए हैं।

हर साल रेस्क्यू नहीं, स्थायी समाधान चाहिए
बारिश रुकने के बाद पानी उतर जाएगा, रास्ते खुल जाएंगे और जिंदगी फिर सामान्य हो जाएगी। लेकिन नदीपारा की मूल समस्या वहीं रह जाएगी—सड़क का अभाव। करीब 40 साल से बसे इस पारे के ग्रामीणों के लिए हर मानसून में मानव शृंखला बनाना समाधान नहीं हो सकता। राहत और रेस्क्यू जरूरी है, लेकिन स्थायी समाधान सड़क और सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था है। सवाल यही है कि अगली बारिश में फिर मानव शृंखला बनेगी या तब तक नदी पारा तक सड़क पहुंच पाएगी?

