कुकर ठंडा भी नहीं हुआ… और भर्ती में सीटी फिर बज गई!”
अनुमोदन से पहले ही नियुक्ति—मैनपुर में ‘भर्ती एक्सप्रेस’ का खुलासा
(बस्तर की माटी न्यूज़ – BKM NATIONAL NEWS, गरियाबंद)
मैनपुर जनपद इन दिनों ऐसा प्रतीत होता है मानो घोटालों का “सीजन ऑफर” चल रहा हो—एक खत्म नहीं होता, दूसरा खुद लाइन में लग जाता है। अभी आंगनबाड़ी “कुकर कांड” की सीटी ठंडी भी नहीं हुई थी कि अब “भर्ती कांड” का ढक्कन भी उछलकर दूर जा गिरा।

मामला महिला एवं बाल विकास विभाग का है, जहां कागजों में प्रक्रिया “प्रगति पर” दिखाई गई, लेकिन हकीकत में नियुक्ति पत्र “फास्ट ट्रैक मोड” में दौड़ते नजर आए। 24 मार्च को अनुमोदन बैठक और 8 अप्रैल की सामान्य सभा में प्रक्रिया जारी बताई गई, लेकिन हैरानी की बात यह है कि नियुक्ति पत्र 27 मार्च को ही जारी हो चुके थे। लगता है यहां कैलेंडर भी सरकारी नहीं, बल्कि “जादुई टाइम मशीन” पर चल रहा है!

जनपद सदस्य परमेश्वर मालू और डॉ. योगीराज माखन कश्यप ने कुछ“सीक्रेट रेसिपी” का खुलासा किया, तो बंद कमरे की बैठकों, पत्रकारों की एंट्री पर रोक और अंदरखाने पक रही “सेटिंग बिरयानी” की खुशबू भी बाहर आने लगी।

सूत्रों के अनुसार, 9 मार्च को सर्व संबंधित अभ्यर्थियों को सूचना दी गई और 16 मार्च तक दावा-आपत्ति का समय तय किया गया। इसी दौरान दो आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सात सहायिकाओं की नियुक्ति की “स्क्रिप्ट” पहले ही लिख ली गई। दिमाग लगाने वाले इस दावा आपत्ति का समय अवधि के भीतर ही किसका नसीब में घी शक्कर यहां जान लेते हैं और पासा फेंकना चालू कर देते हैं । दावा-आपत्ति की प्रक्रिया मानो सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गई—जैसे मैच शुरू होने से पहले ही स्कोर बोर्ड तय कर दिया गया हो।
सूत्र यह भी बताते हैं कि इस पूरे खेल में विभाग का एक “अनुभवी खिलाड़ी” सक्रिय रहता है, जिसे इस तरह की सेटिंग और वसूली का पुराना अनुभव है। अंदरूनी जानकारी पहले ही “चयनित खिलाड़ियों” तक पहुंचा दी जाती है और फिर नियुक्ति का फाइनल रिजल्ट सिर्फ एक औपचारिक घोषणा बनकर रह जाता है।

हाल हीं में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि एक अभ्यर्थी, जिसने अधिक अंक प्राप्त किए थे, उसे केवल इस आधार पर बाहर कर दिया गया कि उसने कोरोना काल में परीक्षा पास की थी। अब सवाल उठता है—क्या कोरोना काल में पास हुए अभ्यर्थी अयोग्य हो जाते हैं? क्या सरकार ने ऐसा कोई नियम जारी किया है? अगर नहीं, तो फिर यह “नया नियम” किस किताब से निकाला गया? या फिर यह भी उसी “सेटिंग मैन्युअल” का हिस्सा है?
उधर अधिकारी कहते हैं—“समिति निर्णय लेती है, हम केवल अनुमोदन करते हैं।” और इधर एक वायरल ऑडियो में समिति के एक सदस्य खुद स्वीकार करते सुनाई देते हैं—“सबने दस्तखत कर दिया था, मैंने भी कर दिया।”
अब सवाल यह है कि यहां भर्ती प्रक्रिया चल रही है… या सिर्फ “साइन एंड सर्विस” योजना?
मैनपुर में यह पूरा मामला अब “कुकर के बाद भर्ती” वाला कॉम्बो पैक बन चुका है, जिसमें पारदर्शिता कम और ‘प्रेशर’ ज्यादा नजर आ रहा है।
बस्तर की माटी न्यूज़ मांग करता है कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच हो, ताकि अगली बार कम से कम सीटी बजने से पहले ढक्कन तो कस लिया जाए—वरना जनता के भरोसे का यह कुकर एक दिन पूरी तरह फट सकता है।

