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बिल फर्जी और सागौन लकड़ी तस्कर निष्ठुरी पर फोरजरी का केस दर्ज करने तथा जेल भेजने वाले एस डी ओ और वन परिक्षेत्र अधिकारी ने सांठ-गांठ कर मामले को रफा-दफा वाहन छोड़ दिया, रिश्वतखोरी का लग रहा गंभीर आरोप



घनश्याम यादव (प्रधान संपादक) बस्तर के माटी समाचार

बीजापुर जिले के भोपालपटनम वन परिक्षेत्र के अंतर्गत जिस प्रकार एक उच्च अधिकारी द्वारा एक स्थानीय संपादक को दिए गए अपने बयान के अनुसार कार्यवाही करने के बजाय सांठ-गांठ कर मामला रफा-दफा कर सागौन से भरी पिकअप वाहन को छोड़ दिया। वन परिक्षेत्र अधिकारी भोपालपटनम ने भी तस्करी करने वाले मधु मनगुर तेलंगाना निवासी जिसका काफी दिनों से वन विभाग को तलाश थी और कार्यवाही करने जिस प्रकार मोबाइल पर भी तस्करी से जूड़ी अहम सुराग मिलने की बात कही थी  जिस प्रकार एस डी ओ वन विभाग का एक बयान वायरल हुआ है उससे यही साबित होता है कि
रोहित नाम का फर्नीचर मार्ट से 20 /6 /2019 को दीवान के नाम से बिल जारी किया गया उसके बाद रेंजर साहब 21 /12 /2023 को टीपी जारी करते हैं जब इस सागौन दीवान को लेकर जाता है संबंधित व्यक्ति को तारलागुड़ा नाका में पकड़ा जाता है और विभाग के अधिकारी ने फर्जी बिल बताकर बड़ी कार्यवाही भी की है।


इस पर एसडीओ साहब कहते हैं कि 2019 का बिल बुक को कापी कर के बनाया गया था इतनी बारीकी से किया गया था कि किसी को भी पकड़ में नहीं आएगा ऐसा काम किया गया है जो पूरी तरह से फर्जी है दोबारा भी बिल का मिलान कर जांच किया गया तो पता चला कि फर्जी बिल है
इस बड़ी कार्यवाही के कुछ दिन पश्चात संबंधित विभाग के अधिकारी मधु नामक व्यक्ति मनगुर तेलंगाना निवासी की सागौन दीवान से भरी पिकअप वाहन और मालिक को सांठ-गांठ कर छोड़ दिया। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस बड़े खेल में रिश्वत लेकर मामला रफा-दफा करने की बात सामने आ रही है।

एस डी ओ साहब का दिया गया बयान


इस संबंध में देश के पारदर्शिता वाली कानून सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 6 (1) के तहत जानकारी नहीं दी जा रही है। सूत्रों से यह भी जानकारी मिली है कि बस्तर के माटी समाचार पत्र के संपादक घनश्याम यादव को ही फर्जी पत्रकार साबित करने में लगे हुए हैं ताकि अपने उपर लगे दाग को मिटा सकें। सूत्रों की मानें तो वन परिक्षेत्र अधिकारी भोपालपटनम जब इंद्रावती टायगर रिजर्व पामेड़ क्षेत्र के धरमारम में पदस्थ थे तब विभाग में चारागाह और देव गुड़ी निर्माण कार्य में लाखों के वित्तीय अनियमितता करते पाए गए जांच के आदेश भी दिए गए लेकिन वहां भी अधिकारियों से सांठ-गांठ कर मामला रफा-दफा करने सफल हो गए।
अब देखना यह है कि आखिर वन परिक्षेत्र अधिकारी भोपालपटनम पर कब तक जांच कर कार्यवाही की जाएगी।आने वाला समय ही बताएगा।

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