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आत्महत्याओं का सिलसिला: 15 दिन में 12 सुसाइड अटेम्प्ट, 9 को बचाया गया, 3 की मौत

सुसाइड का ईपिक सेंटर बना इंदा गांव

संवाददाता, इंदा गांव (मैनपुर)

इंदा गांव में बीते 15 दिनों के भीतर आत्महत्याओं की घटनाओं ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी है। अब तक 12 आत्महत्या के प्रयास सामने आए हैं, जिनमें से 9 लोगों को समय रहते बचा लिया गया, जबकि 3 लोगों की मौत हो चुकी है। इस भयावह स्थिति ने ग्रामीणों के मन में गहरी चिंता और भय पैदा कर दिया है। आत्महत्या के प्रयास करने वालों में ज्यादातर युवा शामिल हैं, जिनमें कुछ लड़कियां और महिलाएं भी हैं।

प्रेम संबंध बना आत्महत्या का मुख्य कारण?

ग्रामीणों के अनुसार, अधिकांश आत्महत्या के प्रयास प्रेम संबंधों से जुड़े हैं। खासकर युवा लड़के-लड़कियों के बीच के तनाव और असफल रिश्ते इन घटनाओं के पीछे की वजह बताए जा रहे हैं। माता-पिता भी इस स्थिति से बेहद चिंतित हैं और अपने बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर फिक्रमंद नजर आ रहे हैं।

कल ही 5 आत्महत्या के प्रयास, एक की मौत

कल गांव में एक ही दिन में 5 आत्महत्या के प्रयास किए गए। इनमें से 4 को ग्रामीणों ने समय रहते बचा लिया, जबकि 19 वर्षीय चंद्रशेखर यादव की मौत हो गई। मृतकों में 20 वर्षीय कमल यादव और 45 वर्षीय गजेंद्र यादव भी शामिल हैं, जिनकी मौत ने गांव में मातम का माहौल पैदा कर दिया है।

युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर सवाल

सुसाइड अटेम्प्ट करने वाले युवाओं की उम्र 25 से 30 वर्ष के बीच बताई जा रही है। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि युवाओं के बीच बढ़ते तनाव, असफल प्रेम संबंध, बेरोजगारी और सामाजिक दबाव के कारण यह गंभीर स्थिति पैदा हो रही है। कुछ माता-पिता ने खुलासा किया है कि उनके बच्चे लंबे समय से अवसाद में थे, लेकिन वे इस समस्या को समझने में असमर्थ रहे।

गांव का माहौल बना तनावपूर्ण

गांव में लगातार हो रही आत्महत्याओं से ग्रामीणों के बीच भय का माहौल है। माता-पिता अब अपने बच्चों पर कड़ी नजर रख रहे हैं और उन्हें अकेला छोड़ने से बच रहे हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों ने प्रशासन और सरकार से एक मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता अभियान चलाने की मांग की है, ताकि युवाओं को अवसाद और तनाव से बाहर निकाला जा सके।

प्रशासन से सहायता की मांग

ग्रामीणों का कहना है कि गांव में काउंसलिंग सेंटर और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की व्यवस्था की जानी चाहिए, ताकि युवाओं को सही मार्गदर्शन मिल सके। इसके साथ ही प्रेम संबंधों से जुड़े विवादों और सामाजिक दबाव को दूर करने के लिए पंचायत स्तर पर विशेष बैठकें आयोजित करने की भी मांग की जा रही है।

क्या कहते हैं मनोवैज्ञानिक?

मनोचिकित्सकों के अनुसार, युवाओं के बीच बढ़ते मानसिक तनाव का मुख्य कारण आपसी संवाद की कमी और पारिवारिक समर्थन की कमी है। माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों के साथ खुलकर बात करें और उनकी भावनाओं को समझें। इसके अलावा, स्कूलों और गांव स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाने की आवश्यकता है।

गांव के युवाओं के लिए हेल्पलाइन की जरूरत

ग्रामीणों ने सरकार से मांग की है कि गांव में एक हेल्पलाइन नंबर शुरू किया जाए, जहां युवा अपनी समस्याओं को साझा कर सकें और मानसिक तनाव से बचने के लिए विशेषज्ञों से परामर्श ले सकें। यदि प्रशासन समय रहते इस स्थिति को नियंत्रित नहीं करता है, तो आने वाले दिनों में स्थिति और भी भयावह हो सकती है।

(जागरूकता और सही मार्गदर्शन ही युवाओं को इस मानसिक अवसाद से बाहर निकाल सकता है)

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