इंदागांव में आत्महत्या की बढ़ती घटनाएं: प्रशासन अलर्ट, सख्त कदम उठाने के निर्देश
इंदागांव: क्षेत्र में आत्महत्या की बढ़ती प्रवृत्ति चिंता का विषय बन गई है। हाल ही में अलग-अलग घटनाओं में तीन युवाओं ने आत्महत्या का प्रयास किया, जिनमें दो युवक और एक युवती शामिल थे। इन तीनों का नाम है कोमल यादव उम्र 21 वर्ष पिता गुरुवार यादव , दयाराम यादव 25 वर्ष पिता मोहन यादव ,सजना बाई उम्र 23 पति झुमका लाल। गनीमत रही कि समय रहते तीनों को बचा लिया गया। इनमें से दो युवक भेजोकोट पारा के रहने वाले हैं, जो अब आत्महत्या के लिए कुख्यात स्थान बनता जा रहा है। सबसे पहले इस खबर को बस्तर के माटी न्यूज़ ने प्रमुखता से दिखाया था जिससे प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया था और स्वास्थ्य विभाग की तरफ से मानसिक स्वास्थ्य जागरूक कार्यक्रम भी किया गया था ।

प्राथमिक जांच में आत्महत्या की प्रमुख वजह नशा और बेरोजगारी मानी जा रही है। इन घटनाओं के बाद प्रशासन हरकत में आया और एसडीएम, एसडीओपी, तहसीलदार, स्वास्थ्य अधिकारी एवं राजस्व विभाग के अधिकारियों ने आपात बैठक बुलाई। बैठक में युवाओं और बुजुर्गों से संवाद कर उनकी समस्याओं को समझने का प्रयास किया गया।

नशे पर सख्त कार्रवाई के आदेश
एसडीओपी ने इंदागांव थाना को निर्देश दिए हैं कि उड़ीसा से शराब पीकर आने वालों पर ड्रिंक एंड ड्राइव केस दर्ज किया जाए। साथ ही, यदि क्षेत्र में देसी शराब, विशेषकर महुआ दारू या लहान बनाई जा रही हो, तो उस पर तत्काल पाबंदी लगाई जाए। आदिवासी बहुल इस क्षेत्र में देसी शराब का प्रचलन अधिक है, जिससे युवा वर्ग इसकी चपेट में आ रहा है। प्रशासन अब शराब के अवैध ठिकानों की पहचान कर सख्त कार्रवाई करने जा रहा है।

रोजगार विकास पर जोर
एसडीएम ने गांव में रोजगार के अवसर बढ़ाने पर भी जोर दिया, ताकि बेरोजगारी के कारण मानसिक तनाव झेल रहे युवा आत्महत्या जैसे कदम न उठाएं। प्रशासन जल्द ही रोजगार और कौशल विकास से जुड़े कार्यक्रम चलाने की योजना बना रहा है।
स्वास्थ्य विभाग की काउंसलिंग
स्वास्थ्य अधिकारियों ने युवाओं की काउंसलिंग शुरू कर दी है। वे माता-पिता को विशेष रूप से सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं, ताकि उनके बच्चे किसी भी तरह के मानसिक तनाव से बाहर आ सकें।
गांव में डर का माहौल
घटनाओं के बाद गांव में दहशत का माहौल है। बुजुर्गों और ग्राम पंचायत के सदस्यों ने भी मोर्चा संभाला है और घर-घर जाकर काउंसलिंग कर रहे हैं। वे लोगों की मानसिक स्थिति को समझने और उन्हें प्रेरित करने की कोशिश कर रहे हैं।
20 साल पहले भी हुआ था ऐसा माहौल
गौरतलब है कि 15-20 साल पहले भी इंदागांव में इसी तरह का भय का माहौल बन गया था, जब सांप के काटने से सात-आठ लोगों की मौत हो गई थी। उस समय भी पूरा गांव सहमा हुआ था, लेकिन धीरे-धीरे स्थिति सामान्य हो गई।
प्रशासन का सख्त रुख
प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि नशे और अवैध गतिविधियों को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। गांव में निगरानी बढ़ाई जाएगी और आत्महत्या जैसी घटनाओं को रोकने के लिए मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।