गरियाबंद _आजादी के 75 वर्ष बीत जाने के बाद भी 3500 जनसंख्या वाली इंदागांव ग्राम पंचायत सहित आसपास के हजारों ग्रामीण अब भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। अत्यंत पिछड़ा जनजातीय क्षेत्र होने के बावजूद शासन-प्रशासन की घोषणाएं और प्रयास केवल कागजों तक ही सीमित रह गए हैं। क्षेत्र के ग्रामीण लगातार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, उप-तहसील, बैंक सुविधा और अन्य आधारभूत आवश्यकताओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

पूर्ववर्ती भूपेश बघेल सरकार ने इंदागांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की घोषणा की थी, जिसे 2022-23 के बजट में स्वीकृति भी मिली, लेकिन आज तक अस्पताल का संचालन शुरू नहीं हो सका। उप-तहसील की घोषणा भी 2019 में तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारा की गई थी, जिसका आज तक अमल नहीं हो पाया।

ग्रामीणों के अनुसार, कई बार आंदोलन, चुनाव बहिष्कार, धरना, प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने के बावजूद न तो अस्पताल खुला, न उप-तहसील का गठन हुआ और न ही बैंक जैसी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। इसके चलते आमजन को इलाज, सरकारी कामकाज और बैंकिंग के लिए 20-25 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है।

बीते दिनों जिला पंचायत सीईओ श्री जी डी मरकाम , गांव में आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं की जानकारी लेने इंदागांव पहुंचे थे, जहां ग्रामीणों ने पुनः अपनी समस्याओं से उन्हें अवगत कराया और पूर्व में दिए गए ज्ञापन एवं दस्तावेजों की प्रति भी सौंपी।
ग्रामवासियों का कहना है कि अब उन्हें वर्तमान भाजपा सरकार से बड़ी उम्मीद है। ग्रामीणों ने निर्णय लिया है कि कल, जब कलेक्टर कैंप के तहत बामनिझोला पहुंचेंगे, तब वे एक बार फिर अपनी वर्षों पुरानी मांगों को उनके समक्ष रखेंगे और समाधान की दिशा में ठोस पहल की अपेक्षा करेंगे।

ग्रामीणों का कहना है कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि धरातल पर कार्य दिखना चाहिए, क्योंकि शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशासनिक सुविधाओं के अभाव में इस क्षेत्र के लोग लगातार पिछड़ते जा रहे हैं।
