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चौकीदार ही निकाला चोर

वन विभाग के कर्मचारी के घर छापा, 6 नग सागौन के चौखट बरामद

देवभोग। वन संरक्षण के लिए जिम्मेदार वन विभाग के ही एक कर्मचारी के घर से अवैध रूप से संग्रहित की गई बहुमूल्य लकड़ी बरामद होने से क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। रायपुर से आई वन विभाग की उड़नदस्ता टीम ने देवभोग के घूमरगुड़ा क्षेत्र में छापेमारी कर वन विभाग में पदस्थ दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी सत्यवान ठाकुर के घर से 6 नग सागौन के चौखट जब्त किए हैं।

लंबे समय से थी अवैध कटाई की सूचना

सूत्रों के अनुसार, विभाग को लंबे समय से इस क्षेत्र में अवैध लकड़ी कटाई और उसके गुप्त भंडारण की सूचना मिल रही थी। सूचना के आधार पर जब उड़नदस्ता टीम ने छापा मारा, तो सत्यवान ठाकुर के घर से बहुमूल्य सागौन की लकड़ी बरामद हुई। इस दौरान स्थानीय वन विभाग के अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है। क्या वे इस अवैध गतिविधि से अनजान थे, या फिर जानबूझकर इस पर आंखें मूंदे हुए थे?

वन संरक्षण के लिए जिम्मेदार ही बन रहे खतरा

सरकार वन विभाग के कर्मचारियों को इसीलिए नियुक्त करती है ताकि जंगलों की रक्षा हो सके, अवैध कटाई को रोका जा सके और वन संपदा सुरक्षित रह सके। लेकिन जब सुरक्षा करने वाले ही भक्षक बन जाएं, तो सवाल उठना लाजमी है—फिर समाज को सुरक्षा देगा कौन? यह कोई पहला मामला नहीं है जब वन विभाग के कर्मचारियों पर अवैध लकड़ी तस्करी में संलिप्त होने के आरोप लगे हों। कई बार ऐसे कर्मचारियों को विभागीय अधिकारियों द्वारा बचाने की कोशिश भी की जाती है, लेकिन हर बार चोरों के लिए चांदनी रात नहीं होती।

क्या क्षेत्रीय अधिकारी भी थे अनजान?

इस छापेमारी के बाद यह भी जांच का विषय बन गया है कि क्या क्षेत्रीय वनरक्षक और क्षेत्रीय वन अधिकारी इस मामले से अनभिज्ञ थे, या फिर किसी दबाव में इसे अनदेखा कर रहे थे? जब रायपुर से आई टीम ही इस गड़बड़ी को पकड़ सकती है, तो स्थानीय अधिकारियों की भूमिका पर सवाल खड़े होते हैं। मजबूरी में ही सही, लेकिन जब ऊपरी दबाव आता है तो विभाग को कार्रवाई करनी ही पड़ती है। कई समय वन विभाग में कार्यरत कर्मचारी खुद ही लकड़ी की तस्करी में लिप्त रहते हैं । कुछ दिन पहले हमारे चैनल में दिखाया गया था कि किस तरह नर्सरी में बहुमूल्य सराई के लकड़ी का लट्ठा लाकर चोरों के द्वारा छुपाया गया था । क्या यह सब वन विभाग के कर्मचारी मिली भगत के बिना इतनी बड़ी कार्य दूसरों के द्वारा किया जा सकता था व वन विभाग अवगत नहीं थे  ? बड़ा सवाल । जी वन विभाग के द्वारा वृक्ष रोपण को प्राथमिकता दिया जाता है वह उन्हीं के नाकामी के चलते जब वृक्षारोपण किया गया  पौधा मर जाता है , इस क्षेत्र में ही अचानक से आग लग जाता है यह सब चीज को देखते हुए जरूर मन में संदेह होता है रक्षक तो भक्षक नहीं ?

वन संरक्षण की गंभीर चुनौती

जंगलों का संरक्षण पर्यावरण संतुलन के लिए अत्यंत आवश्यक है। पेड़ों की अंधाधुंध कटाई से न केवल हमारा पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ता है, बल्कि ऑक्सीजन और जल स्रोतों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। सरकार द्वारा वन संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयास तभी सफल हो सकते हैं, जब विभाग में भ्रष्टाचार न हो और वन कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी को ईमानदारी से निभाएं। लेकिन जब वही कर्मचारी, जिन्हें जंगलों की रक्षा करनी है, लकड़ी की अवैध तस्करी में लिप्त पाए जाते हैं, तो लोगों का विश्वास तंत्र से उठ जाता है।

आगे की कार्रवाई

वन विभाग ने इस मामले में विस्तृत जांच शुरू कर दी है। सत्यवान ठाकुर के खिलाफ क्या कानूनी कार्रवाई की जाएगी, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। इसके अलावा, यह भी देखा जाएगा कि इस गोरखधंधे में और कौन-कौन संलिप्त हैं। अगर वन विभाग के अन्य अधिकारी या कर्मचारी भी इस अवैध कारोबार में शामिल पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।

निष्कर्ष

इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि जब चौकीदार ही चोरी करने लगे, तो व्यवस्था चरमरा जाती है। वन संरक्षण एक राष्ट्रीय जिम्मेदारी है, और इसे सुनिश्चित करने के लिए सख्त निगरानी की जरूरत है। अगर इस तरह के मामलों पर समय रहते लगाम नहीं लगाई गई, तो जंगलों की अवैध कटाई पर रोक लगाना मुश्किल हो जाएगा। सरकार और वन विभाग को इस घटना से सीख लेकर कठोर कदम उठाने होंगे, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों।

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