बिजली खंबा के सपोर्ट तार से चिपककर बेला की मौत
बस्तर के माटी न्यूज़ (BKM)गरयाबंद
शागड़ा, 1 जून 2025 — बारिश के मौसम में करंट से जानवरों की मौत की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। ताजा मामला सगड़ा के राऊल गुड्डी पारा का है, जहां आज सुबह करीब 10:30 बजे एक बेला की ट्रांसफार्मर से जुड़े सपोर्ट वायर में करंट आने से मौत हो गई। बताया जा रहा है कि सपोर्ट तार में अनजाने में करंट आ गया था, जिससे वह जानवर चिपक गया और उसकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।
यह कोई पहली घटना नहीं है। चार दिन पहले पहले इंदा गांव में भी इसी तरह की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। एक बेल करंट की चपेट में आने के बाद उसे किसी तरह से बचा लिया गया , लेकिन एक साल पहले वहीं पर एक मवेशी और उसे चराने वाले चरवाहे की करंट से मौत हो चुकी है।
इन घटनाओं के बाद अब सवाल बिजली विभाग की लापरवाही पर उठने लगे हैं। जानकारों के अनुसार, बरसात में ज़मीन गीली होने के कारण करंट का प्रवाह ज़मीन के संपर्क में आ जाता है और खंभों या तारों से छूते ही जानलेवा साबित होता है। इंदा गांव और आसपास के क्षेत्रों में कई ऐसे खंभे हैं जहां से धुआं तक निकल रहा है, जो इस बात की ओर इशारा करता है कि वहां भी करंट प्रवाहित हो रहा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई बार बिजली विभाग की लापरवाही को छुपाने के लिए ऐसी मौतों को “प्राकृतिक आपदा” या “आकाशीय बिजली” से जोड़कर मुआवजे की प्रक्रिया में धांधली की जाती है। इससे न केवल जिम्मेदार लोग बच निकलते हैं, बल्कि भविष्य में भी ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति की संभावना बनी रहती है।
क्या कहता है कानून और नीति?
बिजली से होने वाली मौतों में अगर लापरवाही पाई जाती है, तो बिजली विभाग पर कार्यवाही की जा सकती है। इसके बावजूद जिम्मेदारी तय करने की बजाय अक्सर लीपापोती की जाती है।
स्थानीय लोगों की मांग:
बारिश से पहले सभी सपोर्ट तारों और ट्रांसफार्मरों की तकनीकी जांच की जाए।
जहां कहीं भी करंट का रिसाव हो रहा हो, वहां तत्काल सुधार कार्य हो।
लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो।
मृत पशुओं के मालिकों को उचित मुआवजा मिले।
बारिश के इस संवेदनशील मौसम में बिजली विभाग को सतर्कता बरतनी होगी ताकि इंसानों के साथ-साथ पशुओं की जान भी सुरक्षित रह सके। वरना हर बारिश किसी के लिए मातम लेकर आएगा ।

