कृष्णा कुमार कुंजाम
जगदलपुर बस्तर के माटी समाचार, 8 जून 2025: आदिवासी युवा छात्र संगठन (AYSU), बस्तर संभाग ने छत्तीसगढ़ सरकार के युक्तियुक्तकरण नीति के तहत बस्तर संभाग में 741 स्कूलों को बंद करने या विलय करने के निर्णय का घोर विरोध किया है। संगठन के अध्यक्ष लक्ष्मण बघेल ने आज एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इस फैसले को आदिवासी बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करार दिया और इसे तत्काल रद्द करने की मांग की।
लक्ष्मण बघेल ने कहा, “राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 का हवाला देकर सरकार स्कूलों को बंद करने या विलय करने की बात कर रही है, लेकिन यह निर्णय आदिवासी क्षेत्रों की वास्तविकता को नजरअंदाज करता है। बस्तर जैसे नक्सल प्रभावित और दूरस्थ क्षेत्रों में स्कूल बच्चों के लिए शिक्षा का एकमात्र साधन हैं। इन स्कूलों को बंद करने से हजारों आदिवासी बच्चे शिक्षा से वंचित हो जाएंगे, जिसका सीधा असर उनके भविष्य और क्षेत्र के विकास पर पड़ेगा।”
प्रेस विज्ञप्ति में AYSU ने बताया कि बस्तर संभाग के सात जिलों—बस्तर, बीजापुर, कोंडागांव, नारायणपुर, दंतेवाड़ा, कांकेर और सुकमा—में कुल 1629 स्कूलों को युक्तियुक्तकरण के नाम पर बंद करने या विलय करने की योजना है। संगठन का दावा है कि यह कदम शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के बजाय ड्रॉपआउट दर को बढ़ाएगा और शिक्षक-छात्र अनुपात को और खराब करेगा।
AYSU ने मांग की है कि सरकार इस फैसले को तुरंत वापस ले और इसके बजाय स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं जैसे शिक्षकों की नियुक्ति, पुस्तकालय, विज्ञान प्रयोगशाला, और खेल सामग्री उपलब्ध कराने पर ध्यान दे। संगठन ने यह भी चेतावनी दी कि यदि सरकार ने यह निर्णय वापस नहीं लिया, तो AYSU सड़कों पर उतरकर आंदोलन तेज करेगा।
बस्तर संभाग के संयुक्त संचालक शिक्षा के अनुसार, युक्तियुक्तकरण का उद्देश्य कम छात्र संख्या वाली स्कूलों को एकीकृत कर बेहतर संसाधन उपलब्ध कराना है। हालांकि, AYSU का कहना है कि यह नीति ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों की भौगोलिक और सामाजिक चुनौतियों को समझे बिना लागू की जा रही है। संगठन ने स्थानीय समुदायों और स्कूल प्रबंधन समितियों के साथ चर्चा किए बिना लिए गए इस फैसले को शिक्षा के अधिकार अधिनियम का उल्लंघन बताया।
AYSU के बस्तर संभाग सचिव अनिल बघेल ने कहा, “हमारी मांग स्पष्ट है—सरकार को आदिवासी बच्चों के भविष्य को प्राथमिकता देनी चाहिए। स्कूल बंद करने के बजाय, शिक्षकों की कमी को दूर करने और स्कूलों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने की जरूरत है।”
संगठन ने सभी सामाजिक संगठनों, छात्रों और स्थानीय जनता से इस मुद्दे पर एकजुट होने की अपील की है। AYSU ने यह भी घोषणा की कि वह जल्द ही एक व्यापक सर्वेक्षण करेगा, जिसमें स्कूल बंद होने से आदिवासी और दलित समुदायों पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन किया जाएगा, और इस डेटा को जनता के सामने प्रस्तुत किया जाएगा।

