RNI NO. CHHHIN /2021 /85302
RNI NO. CHHHIN /2021 /85302
best news portal development company in india
best news portal development company in india

धरती आबा शिविर में अव्यवस्था का तांडव: चिखली पंचायत में अफसरों की गैरहाजिरी से आदिवासी समुदाय का भरोसा टूटा

बस्तर की माटी न्यूज़,(BKM NATIONAL NEWS), गरियाबंद

जनजातीय गौरव वर्ष के अंतर्गत केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना “धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान” का उद्देश्य था कि अनुसूचित जनजाति समुदाय तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचे और उनका सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण हो। गरियाबंद जिले के 334 चयनित जनजातीय बाहुल्य ग्रामों में इसके लिए शिविर आयोजित किए जा रहे हैं।

लेकिन रविवार, 13 जुलाई को मैनपुर जनपद की चिखली ग्राम पंचायत में आयोजित धरती आबा शिविर सरकारी लापरवाही और अफसरों की गैरजिम्मेदारी का शिकार बन गया।

नोडल अधिकारी ही नदारद, ग्रामीण हुए हताश

जिस शिविर में 14 पंचायतों – चिखली, दाबरी गुड़ा, घुमरा पदर, खरीपथरा, कोदो भाटा, मुडगेल माल आदि से लोग जाति प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, स्वास्थ्य बीमा कार्ड और अन्य जरूरी सेवाओं की उम्मीद लेकर आए थे, वहां के नोडल अधिकारी रेखराज बीसी , पंचायत सचिव और पटवारी की अनुपस्थिति ने लोगों के भरोसे को तोड़ दिया।

घुमरा पदर के आक्रोशित ग्रामीण सुखीराम ने कहा “हम कई किलोमीटर दूर से आए, पर यहां न कोई सुनवाई है और न अधिकारी। क्या यही सरकार का आदिवासी सशक्तिकरण है?”

कुछ विभाग आए, ज्यादातर नदारद

_ इस शिविर में केवल 11 आवेदन जमा हुए, सभी खाद्य विभाग के थे

_ स्वास्थ्य विभाग ने 32 लोगों के आयुष्मान कार्ड बनाए और सामान्य स्वास्थ्य जांच की।
_ वन विभाग और शिक्षा विभाग,पशुधन विभाग के कुछ कर्मचारी मौजूद रहे।

 

लेकिन बिजली, राजस्व, सामाजिक न्याय, महिला-बाल विकास और अन्य अहम विभागों के अफसरों ने इस शिविर को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया।

सरकार की मंशा पर सवाल_

जनजातीय कार्य मंत्रालय के पत्र क्रमांक D.O.No_12017/01/2025_DAJGUA _Part(1) के तहत इन शिविरों को “अत्यंत महत्वपूर्ण” श्रेणी में रखा गया था। इसके बावजूद, चिखली ग्राम पंचायत में अधिकारियों की अनुपस्थिति और अव्यवस्था ने धरती आबा शिविर की साख पर बट्टा लगा दिया।

जनजातीय सशक्तिकरण पर सवाल: चिखली पंचायत का धरती आबा शिविर बना मजाक । ग्रामीणों का फूटा गुस्सा

ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि अगर भविष्य में भी इसी तरह के दिखावटी शिविर होंगे तो वे जिला मुख्यालय पर विरोध प्रदर्शन करेंगे।

अधिकारियों की चुप्पी_

पूछे जाने पर संबंधित विभागों के अधिकारियों ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

सवाल उठता है कि, क्या धरती आबा शिविर सरकारी उपेक्षा की भेंट चढ़ गया?

क्या आदिवासी समुदाय तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना सिर्फ कागजों तक सीमित है?

यह शिविर आदिवासी विकास का अवसर था या सरकारी लापरवाही का आईना? यह सवाल अब हर गांव की पंचायत में चर्चा का विषय बन गया है।

Facebook
Twitter
WhatsApp
Reddit
Telegram

Leave a Comment

Powered by myUpchar

Weather Forecast

DELHI WEATHER

पंचांग