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सावधान! सूखे की आहट और पर्यावरण विनाश की संकट

पानी और पेड़, दोनों बचाने होंगे वरना भविष्य सूखा है

बस्तर की माटी न्यूज़(BKM NATIONAL NEWS), गरियाबंद

मैंनपुर ब्लॉक के किसानों के दिलों में 1976-77 का भयानक सूखा फिर से डर पैदा कर रहा है। बीते 15 दिनों से बारिश न होने से खेतों की मिट्टी फटने लगी है, धान के पौधे पीले पड़ चुके हैं और कई जगह फसलें पूरी तरह जल गई हैं। अगर आगामी चार-पांच दिनों में बारिश नहीं हुई, तो यह क्षेत्र सरकारी रिकॉर्ड में भले ही “सूखा प्रभावित” न दिखे, लेकिन किसानों के लिए यह साफ तौर पर अकाल की चेतावनी है।

सूखे से त्रस्त किसान, गिरता भूजल स्तर

जुलाई के महीने में जहां खेत, तालाब और नाले पानी से लबालब होते थे, आज वहां सूखी दरारें दिखाई दे रही हैं। भूजल का स्तर खतरनाक रूप से गिर चुका है। ग्रामीण बताते हैं कि अप्रैल-मई में अगर जलस्तर की सही निगरानी और प्रबंधन हुआ होता, तो आज हालात इतने भयावह नहीं होते।

एस.डी.एम. द्वारा अवैध बोरवेल खनन पर रोक लगाने के आदेश के बावजूद क्षेत्र में बोर खनन बेरोकटोक जारी रहा। परिणामस्वरूप, आने वाले दिनों में डबरी और छोटे तालाब भी सूख सकते हैं, जिससे न केवल इंसानों बल्कि वन्यजीवों के लिए भी संकट खड़ा होगा।

पेड़ कटाई और बारिश का टूटा रिश्ता

ग्रामीणों का आरोप है कि अंधाधुंध पेड़ कटाई ने बारिश के चक्र को ही बिगाड़ दिया है। लकड़ी, ईंधन और खेती के विस्तार के नाम पर जंगलों का सफाया कर दिया गया। अब जिन खेतों में हरियाली लहलहाती थी, वहां पड़ी दरारें लोगों को डराने लगी हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “एक पेड़ मां के नाम” जैसे अभियानों के बावजूद, जमीनी स्तर पर जागरूकता और क्रियान्वयन की कमी साफ दिखाई दे रही है।

किसानों का दर्द और जरूरी कदम

किसान जिनकी आजीविका का आधार धान की खेती है, अब हताश और डरे हुए हैं। पानी की कमी और खाद की महंगाई ने उनके सपनों को तोड़ डाला है। अगर तत्काल ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो मैनपुर क्षेत्र के कई गांवों में त्राहि-त्राहि मच सकती है।

सरकार को उठाने होंगे ये कदम_

_ सूखाग्रस्त क्षेत्र घोषित करना – प्रभावित गांवों को प्राथमिकता दी जाए।

_जल संरक्षण योजनाओं पर जोर – खेत तालाब, बोरी बांध और रूफ वॉटर हार्वेस्टिंग अनिवार्य हो।

_अवैध पेड़ कटाई पर रोक – पंचायतों और ग्रामीण समितियों को सशक्त किया जाए।

_कृषि राहत पैकेज – मुफ्त बीज, खाद और डीजल अनुदान दिया जाए।

_ सामूहिक वृक्षारोपण अभियान – हर गांव में मानसून के दौरान वृक्षारोपण किया जाए।

 

पेड़ और पानी का रिश्ता गहरा है। अगर पेड़ नहीं होंगे तो न बारिश आएगी, न पानी बचेगा और न ही किसान की मुस्कान। समय की मांग है कि हम अभी जागें, नहीं तो आने वाली पीढ़ियां हमें माफ नहीं करेंगी।

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