तोयनार में चिकित्सा उपेक्षा: कन्या आश्रम की छात्रा की मौत के बाद भी उप स्वास्थ्य केन्द्र पर डाक्टरों की तैनाती नहीं
बीजापुर बस्तर के माटी समाचार, 5 अगस्त 2025 बीजापुर जिले के गांव तोयनार में स्थित कन्या आश्रम, छात्रावास और पोटा केबिन में रहने वाले लगभग 850 बच्चों के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी मात्र एक पुरुष स्वास्थ्य कर्मचारी और एक एएनएम (नर्स) के कंधों पर है। इसी चिकित्सा सुविधाओं की भारी कमी के चलते आश्रम में रहकर पढ़ रही तीसरी कक्षा की छात्रा का बीते 30 जुलाई को इलाज न मिल पाने के कारण दम तोड़ दिया।
व्यवस्था की विफलता पर सवाल
तोयनार स्वास्थ्य केंद्र में पिछले कई महीनों से नियमित डॉक्टर की पदस्थापना नहीं है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी कर्मचारियों की कथित कमी का हवाला देते रहे हैं।
तोयनार और आसपास के लगभग **10 गांवों के हजारों निवासी** भी इसी अल्पसुविधा युक्त स्वास्थ्य केंद्र पर निर्भर हैं, जहां गंभीर मामलों में डॉक्टरी सलाह या उपचार दुर्लभ है। जिसका पूरा लाभ तोयनार में बसे 2 झोलाछाप डॉक्टर उठा रहे हैं
त्रासदी के बाद भी निष्क्रियता
शर्मिला की दर्दनाक मौत के तीन दिन बीत जाने के बावजूद, **जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग** ने तोयनार क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और तत्काल एक डॉक्टर की तैनाती सुनिश्चित करने की कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिखाई है। यह लापरवाही गंभीर सवाल खड़े करती है।
**आश्रम प्रबंधन और स्थानीय लोगों में आक्रोश:**
आश्रम के एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, *”शर्मिला को हमने स्वास्थ्य केंद्र में दिखाया, लेकिन डॉक्टर न होने से उचित इलाज नहीं मिल सका। उसे जिला अस्पताल ले जाने का प्रबंध करना पड़ा लेकिन देरी से रिपोर्ट और डाक्टरों द्वारा बीमारी की पहचान न कर पाना यह व्यवस्था की विफलता है।”*
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि अक्सर महिलाओं और बच्चों को जरूरी इलाज के लिए गांव में 2 झोलाछाप डॉक्टरों का रुख करना पड़ता है, जिसका लाभ में झोलाछाप डॉक्टर जमकर उठाते हैं।
जिला प्रशासन को चाहिए कि शर्मिला की मौत की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करे, तोयनार स्वास्थ्य केंद्र पर तत्काल एक योग्य डॉक्टर की नियुक्ति करे,आश्रम, छात्रावास और पोटा केबिन के बच्चों सहित पूरे क्षेत्र के लिए चौबीसों घंटे उचित स्वास्थ्य सुविधा सुनिश्चित करें।
और स्वास्थ्य विभाग द्वारा दूरस्थ आदिवासी इलाकों में चिकित्सा स्टाफ की तैनाती और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए ठोस योजना बनाई जाए
शर्मिला की मौत सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि तोयनार गांव और इन इलाकों में लगातार उपेक्षित स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही की कहानी है। सवाल यह है कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को एक और जान जाने का इंतजार है या वे तुरंत कदम उठाएंगे? देखना होगा।

