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बिना तकनीकी निगरानी के चल रहा ₹30 लाख का कॉलेज मरम्मत कार्य, ठेकेदार को एडवांस में मिला ₹12 लाख — डीएमएफ फंड में भारी लापरवाही उजागर

घनश्याम यादव

बीजापुर भोपालपटनम बस्तर के माटी समाचार जिले के भोपालपटनम में शासकीय इंद्रावती महाविद्यालय के भवन की मरम्मत कार्य में बड़ी लापरवाही सामने आई है। जर्जर हो चुके भवन की मरम्मत के लिए जिला खनिज न्यास निधि (DMF) से ₹30 लाख 12 हजार की राशि 25 जुलाई 2025 को स्वीकृत की गई है। लेकिन महज 2 दिन पहले शुरू हुए इस कार्य में न तो कोई सब-इंजीनियर है, न कोई तकनीकी सहायक, जिससे पूरे कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

बिना इंजीनियर, बिना तकनीकी पर्यवेक्षण — किसकी निगरानी में चल रहा काम?

इतनी बड़ी राशि से हो रहे कार्य में किसी भी इंजीनियर या तकनीकी कर्मी की निगरानी न होना अपने आप में एक चौंकाने वाली बात है। जनपद पंचायत भोपालपटनम में पदस्थ सब इंजीनियर और तकनीकी सहायकों ने इस कार्य की जानकारी से खुद को अनभिज्ञ बताया है। इससे स्पष्ट है कि कार्य बिना तकनीकी निरीक्षण के किया जा रहा है — जो सीधे-सीधे DMF फंड के दुरुपयोग की ओर इशारा करता है।

गुनलापेटा का काम, एजेंसी भद्रकाली को क्यों?

इस मरम्मत कार्य का एक और बड़ा सवाल यह है कि महाविद्यालय ग्राम पंचायत गुनलापेटा में स्थित है, लेकिन कार्य एजेंसी भद्रकाली ग्राम पंचायत को बनाया गया है — जो कि स्थल से 20 किलोमीटर दूर है। यह निर्णय भौगोलिक तर्क और प्रशासनिक व्यवहारिकता दोनों के खिलाफ है। इससे संदेह गहराता है कि कार्य एजेंसी की नियुक्ति में भी पक्षपात किया गया है।

ठेकेदार को मात्र दो दिन में ₹12 लाख एडवांस भुगतान!

यह और भी चौंकाने वाली बात है कि कार्य प्रारंभ होने के केवल दो दिन बाद ही, ठेकेदार को ₹12 लाख की एडवांस राशि ग्राम पंचायत द्वारा दे दी गई है। यह स्थानीय प्रशासनिक प्रक्रियाओं की धज्जियाँ उड़ाने जैसा है, क्योंकि आमतौर पर किसी भी सरकारी कार्य में प्रगति के बाद ही भुगतान होता है, वह भी निरीक्षण और अनुमोदन के पश्चात।

DMF कार्यों में पहले भी उठ चुके हैं सवाल

डीएमएफ फंड से पूर्व में कराए गए कई कार्यों में भी जिले में गंभीर भ्रष्टाचार के मामले उजागर हुए हैं।
सूत्रों के अनुसार, कई बार प्रशासकीय स्वीकृति के बाद तकनीकी अनुमोदन आदेश को जानबूझकर दबा दिया जाता है, और कार्य पूर्ण हो जाने के बाद ही फाइलें सार्वजनिक की जाती हैं, ताकि मनचाहे ठेकेदारों को फायदा पहुँचाया जा सके।

अधिकारी जवाब देने से बच रहे

जब इस विषय में जनपद सीईओ सुरेश देवांगन से जानकारी ली गई, तो उन्होंने कहा कि “फाइल देखकर ही कुछ बता सकूँगा।” वहीं अन्य तकनीकी कर्मचारियों ने भी इस पूरे कार्य की जानकारी से पल्ला झाड़ लिया, जो यह दर्शाता है कि इस ₹30 लाख के मरम्मत कार्य में पूरी प्रक्रिया पर पर्दा डालने की कोशिश हो रही है।

इस संबध में कलेक्टर संबित मिश्रा से चर्चा की गई तो उन्होंने बताया की मीडिया के माध्यम से इसकी जानकारी मिली है। जाँच की जाएगी जाँच सही पाए जाने पर कार्यवाही की जाएगी।

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