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बीजापुर में बड़ा घोटाला: 15वें वित्त आयोग की राशि से स्टेशनरी दुकान पर खरीदे गए ‘कुर्सी, टेबल और मीट’!

बीजापुर बस्तर के माटी समाचार: केंद्र सरकार की ग्रामीण विकास योजनाओं के लिए जारी की गई करोड़ों रुपये की राशि पर स्थानीय अधिकारियों की नजर लगने का एक चौंकाने वाला मामला बीजापुर जिले के उसूर जनपद की ग्राम पंचायत चिंताकुंटा से सामने आया है। यहां के पंचायत सचिव पर 15वें वित्त आयोग की राशि का दुरुपयोग करने का गंभीर आरोप लगाया गया है।

क्या है पूरा मामला?

आरोप है कि ग्राम पंचायत चिंताकुंटा के पंचायत सचिव श्री बिच्चेम बीराबोइना ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में 15वें वित्त आयोग से मिलने वाली ग्राम पंचायत की राशि में से 1 लाख 50 हजार रुपये की बड़ी रकम का भुगतान दिनांक 06/06/2024 को कार्तिकेय स्टेशनरी, बीजापुर के नाम पर एक ऑनलाइन बिल के माध्यम से किया।

इस बिल के अनुसार, पंचायत सचिव ने इस राशि के बदले स्टेशनरी की दुकान से कुर्सी, टेबल, अलमीरा और मीट खरीदने का दावा किया है। यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर एक स्टेशनरी की दुकान से ‘मीट’ खरीदने का बिल कैसे बना और उसे पंचायत के खर्च के रूप में कैसे पास किया गया?

DSC का गलत इस्तेमाल और फर्जीवाड़ा

सबसे गंभीर आरोप यह है कि इस पूरे खर्च को अंजाम देने के लिए पंचायत सचिव ने अपने डिजिटल सिग्नेचर कार्ड (DSC) का इस्तेमाल किया, जो इस बात का प्रमाण है कि यह लेन-देन उन्होंने ही अधिकृत किया था। DSC का उपयोग करके ऑनलाइन भुगतान की प्रक्रिया को अंजाम देना इस मामले को और भी गंभीर बना देता है, जो डिजिटल भारत के तहत वित्तीय अनियमितताओं के एक नए तरीके को उजागर करता है।

पंचायत सचिव और दुकानदार ने दिए गोलमोल जवाब

इस मामले की पड़ताल करने पर पंचायत सचिव श्री बीराबोइना और कार्तिकेय स्टेशनरी के दुकानदार दोनों से जब इस खरीद के बारे में सवाल किए गए तो उन्होंने कोई स्पष्ट और संतोषजनक जवाब देने के बजाय गोलमोल जवाब देकर बात को टालने का प्रयास किया। यह उनके कृत्य पर संदेह को और बढ़ाता है।

 

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