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अमलीपदर का ऐतिहासिक जगन्नाथ मंदिर ध्वस्त, भव्य पुनर्निर्माण की तैयारी

बस्तर की माटी न्यूज़ (BKM NATIONAL NEWS),गरयाबंद

मलीपदर क्षेत्र के श्रद्धालुओं के आस्था-केन्द्र रहे 86 वर्ष पुराने जगन्नाथ मंदिर को शनिवार को तोड़ने का कार्य शुरू हुआ। मिश्रा परिवार द्वारा 1939 में निर्मित यह मंदिर अमलीपदर क्षेत्र का पहला जगन्नाथ मंदिर माना जाता है। वर्षों तक यहां भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के दर्शन के लिए दूर-दूर से भक्त आते रहे। इसी मंदिर से क्षेत्र में पहली बार रथयात्रा का आयोजन हुआ था, जो हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को आकर्षित करता था।

पिछले पांच-छह वर्षों से मंदिर की दीवारों और छत में दरारें आने लगी थीं। अत्यधिक जर्जर हो जाने के कारण भगवान की मूर्तियों को पुजारी के घर ले जाकर पूजा-अर्चना की जा रही थी। शनिवार को मिश्रा परिवार ने जेसीबी मशीन से मंदिर को ध्वस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी। मंदिर परिसर में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। कई लोगों की आंखें अपने बचपन की यादों और मंदिर से जुड़े अतीत को सोचकर नम हो गईं, वहीं नया और भव्य मंदिर बनने की खुशी भी उनके चेहरों पर झलक रही थी।

पुराना मंदिर ईंट, चूना पत्थर के पाउडर और पारंपरिक गारे से निर्मित था। मंदिर को गिराते समय ‘जय जगन्नाथ’ और ‘बोल कालिया’ के जयकारों से वातावरण गूंज उठा। बुजुर्गों ने बताया कि उन्होंने अपना बचपन मंदिर के आंगन में खेलते और भगवान के दर्शन करते हुए बिताया था।

मिश्रा परिवार ने बताया कि जल्द ही उसी स्थल पर भव्य “नया जगन्नाथ मंदिर” का निर्माण किया जाएगा। मंदिर के नए स्वरूप में पारंपरिक शिल्प और आधुनिक सुविधाओं का समावेश होगा। ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि नया मंदिर क्षेत्र की आस्था का केंद्र बनेगा और रथयात्रा की पुरानी परंपरा फिर से उसी उत्साह के साथ जीवित होगी।

स्थानीय प्रशासन ने ध्वस्तीकरण कार्य के दौरान सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की। श्रद्धालुओं ने कहा कि युगों से चली आ रही इस परंपरा के पुनर्जीवन से आने वाली पीढ़ियां भी भगवान जगन्नाथ के दर्शन का लाभ उठा सकेंगी।

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