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सुकमा में सीआरपीएफ की मानवीय पहल से प्रसूता और नवजात की बची जान,नक्सल प्रभावित पुवर्ती में अब विकास की रोशनी,आतंक और दहशत की जगह ले रहा विश्वास

राजु तोले

सुकमा बस्तर के माटी समाचार एक समय घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में विख्यात पुवर्ती अब सकारात्मक बदलाव की नई तस्वीर पेश कर रहा है। गुरुवार को इसी बदलाव की मिसाल तब देखने को मिली जब थाना जगरगुंडा के अंतर्गत ग्राम पुवर्ती निवासी महिला श्रीमती मांडवी सुक्की पत्नी श्री मांडवी कोसा गर्भावस्था के दौरान गंभीर दर्द की स्थिति में पुवर्ती फिल्ड अस्पताल पहुँची। महिला की हालत नाजुक देखते हुए 150वीं बटालियन केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) पुवर्ती ने तत्परता दिखाते हुए एम्बुलेंस की व्यवस्था की और उसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जगरगुंडा पहुँचाया। नियत समय में चिकित्सा सुविधा मिलने से प्रसूता और नवजात दोनों की जान सुरक्षित बचाई जा सकी।

इस पुनीत कार्य ने न केवल एक माँ और शिशु को जीवनदान दिया, बल्कि स्थानीय जनता के बीच प्रशासन और सुरक्षा बलों के प्रति विश्वास भी और मजबूत किया। कैम्प में तैनात डॉक्टर ग्रामीणों का नियमित निःशुल्क उपचार करते हैं और दवाइयाँ भी मुफ्त उपलब्ध कराते हैं, जिससे स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच अब सीधे गाँव तक हो गई है।

*बदलाव की नई कहानी लिख रहा पुवर्ती*
कभी नक्सल कमांडर हिड़मा के नाम से भयभीत करने वाले इस क्षेत्र में अब विकास और शांति की तस्वीर उभर रही है। ग्रामीण जहाँ पहले दहशत में जीते थे, वहीं अब सड़क, बिजली, पानी जैसी मूलभूत सुविधाएँ पहुँच रही हैं। गाँव में आंगनबाड़ी भवन और स्कूल खुल चुके हैं और शिक्षा की नई रोशनी घर-घर तक पहुँच रही है।

जिला प्रशासन और सुरक्षा बलों के संयुक्त प्रयास से पुवर्ती में बदलाव की बयार बह रही है। स्वास्थ्य सेवाएँ, शिक्षा, आधारभूत सुविधाएँ और सुरक्षा इन सबके समन्वय ने यह साबित कर दिया है कि शासन-प्रशासन की संवेदनशीलता और समर्पण से सबसे चुनौतीपूर्ण इलाकों में भी विकास और विश्वास का नया अध्याय लिखा जा सकता है।

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