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स्वच्छ भारत मिशन के तहत ग्राम पंचायत नैमेड़ में आधा-अधूरा काम कराकर उसे ‘मॉडल ग्राम’ घोषित किया गया।ग्राम पंचायत नैमेड़ में स्वच्छ भारत मिशन के नाम पर बड़ा घोटाला, आधे-अधूरे काम को ‘मॉडल ग्राम’ घोषित करने अधिकारी-ठेकेदार का सांठ-गांठ का आरोप

घनश्याम यादव सम्पादक

बीजापुर बस्तर के माटी समाचार स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत छत्तीसगढ़ की ग्राम पंचायत नैमेड़ को ‘मॉडल ग्राम’ घोषित किए जाने के पीछे बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं। आरोप है कि विकासखंड स्तर के अधिकारी और जिला सलाहकार मिलकर आधे-अधूरे काम को पूरा दिखाकर सरकारी खजाने का दुरुपयोग कर रहे हैं और ग्राम पंचायत पर दबाव बना रहे हैं।

क्या है पूरा मामला?

ग्राम पंचायत नैमेड़ को ODF (खुले में शौच से मुक्त) घोषित होने के बाद राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) द्वारा एक मॉडल ग्राम पंचायत के रूप में चिन्हित किया गया था। हालांकि, स्थानीय सूत्रों और मीडिया जांच में खुलासा हुआ है कि स्वच्छ भारत मिशन की कई योजनाओं का लाभ ग्रामीणों तक नहीं पहुंच पाया है।

सबसे बड़ी विसंगति: हैंडपंप और सोख्ता गड्ढे

गांव की लगभग 3000 की आबादी को देखते हुए यहां कम से कम 15 हैंडपंप होने चाहिए, जबकि स्वच्छ भारत मिशन की वेबसाइट पर जीओ टैगिंग के आधार पर पता चला है कि ग्राम में केवल 05 हैंडपंप पर ही सोख्ता गड्ढा (लीच पिट) बनाकर कार्य पूरा दिखाया गया है। इन्हीं पांच हैंडपंपों के आधार पर ग्राम नैमेड़ को ‘तरल अपशिष्ट प्रबंधन युक्त मॉडल ग्राम’ घोषित कर दिया गया।

राष्ट्रीय मानक बनाम जमीनी हकीकत

· मानक: ग्रामीण पेयजल आपूर्ति मैनुअल के अनुसार प्रति 200 व्यक्तियों पर एक हैंडपंप होना चाहिए।
· हकीकत: 3000 की आबादी पर सिर्फ 5 हैंडपंप। यानी लगभग 600 लोगों के लिए एक हैंडपंप, जो मानक से तीन गुना खराब स्थिति है।

आरोप: कमीशन और दबाव का खेल

मीडिया को मिली जानकारी के अनुसार, विकासखंड स्तर पर पदस्थ अधिकारी ईश्वर गुरला पर गंभीर आरोप लगे हैं। आरोप है कि उन्होंने सरपंच और ग्राम सचिव से मोटी कमीशन की मांग कर काम करवाया। इसके अलावा, उन पर अपने पत्नी और रिश्तेदारों के नाम पर कई ग्राम पंचायतों में कार्य कराकर शासन की राशि हड़पने का भी आरोप है। आरोपों में अमृत दास साहू, जिला सलाहकार का नाम भी उनके सहयोगी के तौर पर लिया जा रहा है।

संदिग्ध सत्यापन प्रक्रिया

ग्राम को मॉडल घोषित करने की प्रक्रिया भी विवादों में घिरी हुई है। 20 अगस्त, 2024 और 28 अगस्त, 2025 को हुए सत्यापन में एम.एन. लकरा (सहायक विकास अधिकारी), लक्ष्मी नारायण कुंजाम (तकनीकी सहायक) राजेंद्र और संतोष जैसे अधिकारी शामिल थे। आरोप है कि इन अधिकारियों ने आधे-अधूरे काम को ही पूर्ण मानते हुए गांव को मॉडल घोषित करने की सिफारिश कर दी, जिस पर ‘सत्पायन दल’ की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

जनता की आवाज और भविष्य की कार्रवाई पर भी सवाल

इस पूरे मामले ने ग्रामीणों में रोष पैदा किया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें विकास का झूठा दिखावा दिखाकर ठगा गया है। अब सभी की नजर जिला कलेक्टर और सीईओ, जिला पंचायत पर टिकी है कि वे इस मामले की जांच कराएं और दोषी अधिकारियों व ठेकेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें। इस खबर के प्रकाशन के बाद प्रशासन की ओर से किस तरह की कार्रवाई होती है, देखना होगा।

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