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गोदामो में चना, फिर भी भूखा उपभोक्ता ! यह चना है कि सिस्टम का कैदी ? रिलीज डेट तय नहीं

ई_पॉज मशीन के बहाने दो माह से रोका गया चना वितरण । उपभोक्ता लोटे खाली हाथ ।

बस्तर की माटी न्यूज़ (BKM NATIONAL NEWS),गरियाबंद

गरियाबंद जिले में भारत सरकार की महत्वाकांक्षी चना वितरण योजना सिस्टम और लापरवाही की भेंट चढ़ती दिख रही है। हालात यह हैं कि उचित मूल्य दुकानों और गोदामों में चना मौजूद है, आवंटन दर्ज है, लेकिन पिछले दो माह से कुछ दुकानों के उपभोक्ताओं को चना नहीं मिल पा रहा। सरकार की “गरीब के घर तक अनाज” की मंशा यहां कागजों में सिमटकर रह गई है।

ई-पॉज मशीन बना बहाना

बस्तर की माटी न्यूज़ की पड़ताल में सामने आया कि मैनपुर और छुरा जैसे माडा व अनुसूचित क्षेत्रों में दिसंबर–जनवरी का चना भंडारित तो कर दिया गया, लेकिन वितरण अधूरा है। उपभोक्ता जैसे ही चना मांगता है, दुकानदार एक ही जवाब देता है— “ई-पॉज मशीन में चना का ऑप्शन नहीं दिख रहा।” यानी सिस्टम सही न हो तो गरीब का हक भी रुक गया। कई पंचायत का उपभोक्ता तो कहते हैं उन्हें पिछले तीन-चार महीने से चना ही नहीं मिल रहा ।

आंकड़े बताते हैं पूरी सच्चाई

देवभोग प्रदाय केंद्र से मैनपुर ब्लॉक की 44 दुकानों में दिसंबर और जनवरी में कुल 1060 क्विंटल चना भेजा गया। मैनपुर प्रदाय केंद्र अंतर्गत 38 दुकानों में भी दिसंबर और जनवरी महीने का 367 और 532 क्विंटल चना पहुंच चुका है। आंकड़े साफ हैं— चना आया, रखा गया, लेकिन बांटा नहीं गया।

गोदाम में सड़ता _बिखरता चना

देरी का सबसे बड़ा खतरा गुणवत्ता को लेकर होता है। पहले भी चना और अन्य खाद्यान्न निम्न गुणवत्ता व कीड़े लगने की शिकायतें सामने आ चुकी हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि लंबे समय तक भंडारण से चना खराब होता है। ऐसे में आशंका गहराती है कि वितरण में देरी होने से कहीं खराब हो चुका चना उपभोक्ताओं को जबरन न बांट दिया जाए।

अफसरों के अलग-अलग बयान

मामले पर सहायक खाद्य अधिकारी कुसुम लता का कहना है कि ई-पॉज मशीन में तकनीकी दिक्कत है। बात को आगे तक पहुंचा दिया गया है । वहीं जिला खाद्य अधिकारी अरविंद दुबे का दावा है कि दुकानों में जनवरी का आवंटन शुरू हुआ है पर ई _पॉज मशीन में चना का ऑप्शन नहीं दिखाने के कारण दिसंबर महीने का वितरण नहीं हो पा रहा है । जहां भी वितरण मैं दिक्कत हो रहा, वहां जांच होगी। यानी विभाग खुद ही स्पष्ट नहीं है कि चना कब का,कहां बंट रहा है और कहां नहीं।

मशीन बड़ी या उपभोक्ता का हक?

सबसे बड़ा सवाल यही है— क्या ई-पॉज मशीन सरकार से ऊपर हो गई है? क्या मशीन में ऑप्शन न होने पर उपभोक्ता अपने हक से वंचित रहेगा? गोदाम में अनाज सड़ता रहे और गरीब लाइन में खड़ा खाली हाथ लौटे— क्या यही व्यवस्था है?

तत्काल समाधान जरूरी

सरकार और विभाग को चाहिए कि ई-पॉज मशीन की तकनीकी खामी तुरंत दूर करे, लापरवाह अधिकारियों व दुकानदारों पर कार्रवाई करे और समय पर दोनों महीने के गुणवत्तापूर्ण चना वितरण सुनिश्चित करे। क्योंकि खाद्यान्न योजना कोई एहसान नहीं, यह उपभोक्ता का अधिकार है— और अधिकार को मशीन के बहाने रोकना किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं ।

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