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एसडीओ की गाड़ी में लकड़ी परिवहन,बेटे की ड्राइविंग और वन विभाग की चुप्पी पर सवाल

राष्ट्रीय पक्षी मोर के दाह संस्कार_प्रोटोकॉल में बड़ी चूक !

बस्तर की माटी न्यूज़ (BKM NATIONAL NEWS),गरयाबंद

उदंती–सीता नदी टाइगर रिज़र्व में अवैध लकड़ी परिवहन का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने वन विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। दिनांक 01 फरवरी 2026 को दैनिक भास्कर को मिली गुप्त सूचना के आधार पर इस पूरे घटनाक्रम का खुलासा हुआ। सूचना में लकड़ी कटाई का स्थान, परिवहन में प्रयुक्त विभागीय गाड़ी, चालक का नाम और संभावित रूट की पूरी जानकारी शामिल थी, जो सीधे सीसीएफ सतोबिसा समाजदार को दी गई थी।

इसके बावजूद सीसीएफ द्वारा भेजी गई राज्य स्तरीय टीम को चकमा देते हुए संबंधित सरकारी जिप्सी वाहन दो-दो नाकों से बिना किसी जांच के एनएच-130 सी से तेज़ रफ्तार में निकल गई। यह स्थिति न केवल निगरानी व्यवस्था की विफलता को दर्शाती है, बल्कि विभागीय लापरवाही या अंदरूनी मिलीभगत की आशंका भी पैदा करती है।

बाद में उदंती–सीता नदी टाइगर रिज़र्व के उपनिदेशक वरुण कुमार जैन के मार्गदर्शन में उनकी टीम ने उक्त गाड़ी को रोका। मौके पर विधिवत जांच के बाद पी.ओ.आर. (प्रकरण अपराध रजिस्टर) दर्ज किया गया और विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई। जांच में सामने आया कि लकड़ी परिवहन से संबंधित कोई वैध परमिट या पास मौजूद नहीं था।
जांच के दौरान यह भी स्पष्ट हुआ कि उक्त सरकारी जिप्सी एसडीओ गोपाल कश्यप के अधीन थी और उसे उनका पुत्र गिरिजा शंकर कश्यप चला रहा था। वाहन में उसके साथ आदित्य सोम, घनश्याम कंवर नामक दो दैनिक श्रमिक मौजूद थे। पूछताछ में चालक द्वारा यह कहा गया कि लकड़ी को विभाग के रेस्ट हाउस ले जाया जा रहा था ।

हालांकि, घटना के बाद रात करीब 8 बजे वन विभाग द्वारा जारी प्रेस नोट में यह दावा किया गया कि गाड़ी में लाई जा रही जलाऊ लकड़ी एक मृत राष्ट्रीय पक्षी मोर के दाह संस्कार के लिए थी। यह दावा मौके पर दिए गए बयान से मेल नहीं खाता, जिससे विभागीय सफाई की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं। स्वयं सीसीएफ सतोबिसा समाजदार ने भी स्वीकार किया कि “सरकारी गाड़ी में लकड़ी का परिवहन गलत है। इसका पीओआर काटा गया है और उच्च स्तरीय जांच की जाएगी।”
मोर के दाह संस्कार को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। वन विभाग अब तक मृत मोर की जियो-टैग फोटो सार्वजनिक नहीं कर सका है, जबकि दैनिक भास्कर को प्राप्त तस्वीरों में मोर को न्यूज़ पेपर पर रखकर फोटो खींचते हुए दिखाया गया है, जो राष्ट्रीय पक्षी के सम्मान और निर्धारित प्रोटोकॉल के विपरीत प्रतीत होता है।

गौरतलब है कि मोर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची- I में संरक्षित है। नियमों के अनुसार राष्ट्रीय पक्षी की मृत्यु होने पर उसका अंतिम संस्कार पूर्ण सम्मान, राष्ट्रीय ध्वज में लपेटकर, वन विभाग के कर्मचारियों को बाकायदा अपने यूनिफॉर्म के साथ सलामी देते हुए और अन्य निर्धारित प्रक्रिया के तहत किया जाना अनिवार्य है। सामने आए तथ्यों से यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा कि इन नियमों का पालन किया गया या नहीं।

इस पूरे मामले पर विधायक बिंद्रा नवागढ़ जनक ध्रुव ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि “एसडीओ की गाड़ी से लकड़ी का परिवहन और मोर के दाह संस्कार में हुई अवहेलना को लेकर मैं विधानसभा में प्रश्न उठाऊंगा।” वहीं, जनपद मैनपुर के वन विभाग सभापति परमेश्वर मालू का कहना है कि “जब विभागीय बैठक बुलाने की बात आती है तो समय की कमी बताकर टाल दिया जाता है, लेकिन ऐसे कार्यों के लिए समय मिल जाता है।”
अब पूरे प्रदेश की जनता का नजर इस कार्रवाई के ऊपर टिकी हुई है ।

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