*जनपद सदस्य राजू सोढ़ी ने*
कृष्ण कुमार कुंजाम ब्यूरो चीफ बस्तर
बस्तर के माटी
बस्तर पाण्डुम का विरोध किया
जनपद सदस्य *श्री राजू सोढ़ी* ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बस्तर पाण्डुम आयोजन का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने कहा कि 7 फरवरी को आयोजित *बस्तर पाण्डुम* कार्यक्रम में भारत की राष्ट्रपति एवं देश की प्रथम आदिवासी महिला माननीय *श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी* के शामिल होने की जानकारी सामने आई है।
*श्री सोढ़ी* ने कहा कि यह अत्यंत दुखद विषय है कि एक आदिवासी महिला होकर, तथा आदिवासी समाज के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन रहने के बावजूद, *बस्तर में लगातार हो रहे आदिवासियों के शोषण, अत्याचार, फर्जी नक्सली मुठभेड़ों तथा जल-जंगल-जमीन और खनिज संपदा की लूट पर आज तक कोई ठोस चिंता या स्पष्ट आवाज़ सामने नहीं आई है। आए दिन आदिवासियों से उनके संवैधानिक और परंपरागत अधिकार छीने जा रहे हैं, लेकिन इस गंभीर मुद्दे पर एक शब्द तक नहीं बोला जा रहा है।*
उन्होंने आगे कहा कि “ *पाण्डुम” शब्द* आदिवासी समाज की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक पहचान से गहराई से जुड़ा हुआ है। इस शब्द का इस प्रकार सरकारी आयोजन में उपयोग करना आदिवासी समाज की आस्थाओं के साथ खिलवाड़ है तथा बस्तर के आदिवासी मूलनिवासियों की भावनाओं का खुला अपमान है।
इन्हीं कारणों से बस्तर के आदिवासी मूलनिवासी समाज द्वारा बस्तर पाण्डुम का विरोध किया जा रहा है और यह विरोध आगे भी जारी रहेगा। अब यह देखना होगा कि आज बस्तर की धरती पर बस्तर के आदिवासी मूलनिवासियों के हित में क्या ठोस घोषणा की जाती है।
सर्व आदिवासी समाज बस्तर संभाग के प्रतिनिधि मंडल को महामहिम राष्ट्रपति महोदया को ज्ञापन सौंपने से प्रशासन द्वारा रोका गया।
यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक ओर आदिवासी समाज से आने वाली राष्ट्रपति देश के सर्वोच्च पद पर आसीन हैं, वहीं दूसरी ओर आदिवासी समाज के प्रतिनिधि मंडल को उनसे मिलने और अपनी बात रखने तक की अनुमति नहीं दी जा रही है।
यह कृत्य आदिवासी समाज का खुला अपमान है।
इस घटना को लेकर सर्व आदिवासी समाज द्वारा पुरजोर विरोध दर्ज किया जा रहा है तथा पूरे आदिवासी समाज में घोर आक्रोश व्याप्त है।

