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कोंडागांव वन मंडल में अवैध वसूली का मामला उजागर, बीट गार्ड के खिलाफ ग्रामीणों ने उठाई आवाज

सत्यानंद यादव

कोंडागांव (छत्तीसगढ़) बस्तर के माटी समाचार। जिले के वन मंडल कोंडागांव अंतर्गत डोगरीगुड़ा, बफना, कोकोडी और फरसगांव बीट क्षेत्र के ग्रामीणों ने वन विभाग के एक कर्मचारी पर अवैध वसूली का गंभीर आरोप लगाया है। ग्रामीणों ने वन मंडलाधिकारी (डीएफओ) को सौंपे एक लिखित शिकायत पत्र में आरोप लगाया है कि बीट गार्ड हितेश खेलवारे ने उन्हें जेल भेजने और प्रकरण दर्ज (पी.ओ.आर.) करने की धमकी देकर लाखों रुपए की नकद राशि वसूल की, लेकिन इसकी कोई आधिकारिक रसीद जारी नहीं की।

 

निजी पेड़ कटान के मामले में उगाही का आरोप

 

शिकायत के अनुसार, ग्रामीणों ने अपनी पट्टे की भूमि या नजूल जमीन पर निजी उपयोग के लिए एक-दो पेड़ काटे थे। इसी मुद्दे को आधार बनाकर बीट गार्ड खेलवारे ने कथित तौर पर उन्हें विभागीय कार्रवाई की धमकी दी और अवैध रूप से रुपये वसूल लिए। शिकायत पत्र में आरोप लगाया गया है कि रयसिंह नेताम से 20 हजार रुपये, रमेश नेताम से 25 हजार रुपये, रामलाल सोरी से 10 हजार रुपये, मंगल नेताम से 25 हजार रुपये, प्रभा नेताम से 30 हजार रुपये, कमलेश सोरी से 8 हजार रुपये तथा रामेश्वर नेताम से 12 हजार रुपये लिए गए।

 

ग्रामीणों का कहना है कि इतनी बड़ी रकम लेने के बावजूद उन्हें कोई पावती या रसीद नहीं दी गई, जिससे उन्हें एहसास हुआ कि उनके साथ नियमों की आड़ में धोखाधड़ी हुई है। इसके बाद वे सामूहिक रूप से डीएफओ कार्यालय पहुंचे और न्याय की गुहार लगाई।

 

अवैध लकड़ी परिवहन का मामला भी चर्चा में

 

इस पूरे प्रकरण के बीच 24 फरवरी की रात लाइवलीहुड कॉलेज चौक के पास लकड़ी से लदे एक वाहन (सीजी 04 एनवी 6055) को पकड़े जाने और उसे अगले दिन छोड़ दिए जाने की घटना भी सुर्खियों में है। बताया जाता है कि वाहन को नियमों के तहत निस्तार डिपो में खड़ा किया गया था, लेकिन अगले दिन उसे लकड़ी सहित मुक्त कर दिया गया। इस कार्रवाई में बीट गार्ड हितेश खेलवारे के साथ ही डिप्टी रेंजर और रेंजर की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं।

 

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ग्रामीणों की मांग

 

ग्रामीणों ने मांग की है कि आरोपी बीट गार्ड हितेश खेलवारे को तत्काल प्रभाव से इस बीट क्षेत्र से हटाया जाए, उनके खिलाफ कठोर विभागीय और आपराधिक कार्रवाई की जाए, और ग्रामीणों से वसूली गई पूरी राशि उन्हें वापस दिलाई जाए।

 

विभागीय जांच की प्रतीक्षा

 

फिलहाल ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी शिकायत पर अब तक विभाग की ओर से कोई ठोस जवाब या आश्वासन नहीं मिला है। इस मामले ने पूरे क्षेत्र में तूल पकड़ लिया है और वन विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। अब सभी की निगाहें वन मंडलाधिकारी द्वारा की जाने वाली जांच और उसके बाद होने वाली संभावित कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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