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दारू का नशा कम, दाम का झटका ज़्यादा — अमलीपदर की सरकारी भट्टी बनी ‘एटीएम मशीन’!”

बस्तर की माटी न्यूज़ (BKM NATIONAL NEWS),गरियाबंद

यहाँ दारू पीने जाओ तो नशा बाद में चढ़ता है, पहले जेब हल्की हो जाती है। और अगर जेब बच भी गई… तो आगे चौराहे पर खड़ी पुलिस “नशा उतार सेवा” में तत्पर मिल जाती है। मतलब साफ है — “इधर कुआं, उधर खाई… और बीच में बेचारा शराबी भाई!”

“पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त…”
सरकारी दारू भट्टी में कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं।
₹200 वाली बियर आराम से ₹220 में, ₹160 वाला कैन सीधे ₹180 में।
ग्राहक भी भोले-भाले —
“भैया ₹220 है? अच्छा… तो होगा!”
लगता है MRP अब “Maximum लूट Price” हो चुका है।

“20-20 का खेल, रोज़ का मेल”
कैमरा देखते ही कर्मचारी का दिल पसीज गया…₹20 वापस कर दिया!
अब सवाल ये है —
अगर कैमरे में ₹20 लौट सकता है, तो बिना कैमरे के रोज़ कितना ‘उड़’ रहा होगा?
गणित के जानकार बताते हैं —
“भाई, ये तो छोटा मोटा नहीं… सीधा ‘घोटाला 3.0’ लग रहा है!”

“सील पैक या दिल पैक?”
अब बात करते हैं असली ‘सस्पेंस थ्रिलर’ की…₹80 वाली मशहूर “शोले मसाला” दारू।ढक्कन ऐसा कि —
“बस छुओ और खुल जाओ!”
सील पैक बोतल का ढक्कन ऐसे निकल रहा था जैसे
“बाबू भैया… ये तो बहुत हल्का है!”
ग्राहकों का दर्द भी छलक पड़ा —
“पहले जैसा नशा नहीं रहा…”अब ये नशा गया कहाँ? कहीं रास्ते में ही “कट” तो नहीं गया?

“दारू पी के जाओ… पुलिस से मिल के आओ”। यहाँ का सिस्टम भी कमाल का है

भट्टी में जेब कटेगी,रास्ते में पुलिस पकड़ेगी
फिर जुर्माना लगेगा,मतलब —
“दारू कम, खर्चा डबल… और टेंशन ट्रिपल!”

“शराबी भी डरे हुए हैं” अब हालात ये हैं कि,शाम होते ही शराबी भी सोच में पड़ जाते हैं —“जाऊं या ना जाऊं?”
भट्टी में डर,चौक में डर और घर में पत्नी का अलग डर

अधिकारी बोले — “₹1 भी ज्यादा लिया तो गलत!”
जब इस मामले में क्षेत्र आबकारी अधिकारी रजत कुमार ठाकुर से बात की गई, तो उन्होंने साफ कहा —
“तय रेट से ₹1 भी ज्यादा लेना गलत है… जांच होगी!”
अब जनता कह रही है —
“सर, जांच नहीं… ‘एक्शन’ चाहिए!”

 

क्या सरकारी दुकान ही ‘ओवररेट’ का अड्डा बन चुकी है?
क्या मिलावट की आड़ में नशा भी कम और कमाई भी ज़्यादा हो रही है?
और सबसे बड़ा सवाल —
सरकार को मिलने वाला पैसा कम है या कर्मचारियों की ‘पर्सनल कमाई’ ज़्यादा जरूरी है?

“दारू तो सरकार बेच रही है…
पर यहाँ तो कहानी कुछ और ही चल रही है —”सरकारी दुकान, प्राइवेट मुनाफा!’”

सरकार इस “20-20 के खेल” पर ब्रेक लगाती है । या फिर शराबियों की जेब ऐसे ही हल्की होती रहेगी…

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