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आरटीआई के आदेश की अनदेखी और 15वें वित्त की राशि पर सवाल, जिला पंचायत सदस्य-सचिव की भूमिका जांच के घेरे में

पंचायत की राशि से अन्य पंचायतों में हैंडपंप खनन का आरोप, वास्तविक ठेकेदार को भुगतान नहीं मिलने की शिकायत ने बढ़ाई चिंता

संपादक घनश्याम यादव

आरटीआई के आदेश की अनदेखी और 15वें वित्त की राशि पर सवाल, जिला पंचायत सदस्य-सचिव की भूमिका जांच के घेरे में
पंचायत की राशि से अन्य पंचायतों में हैंडपंप खनन का आरोप, वास्तविक ठेकेदार को भुगतान नहीं मिलने की शिकायत ने बढ़ाई चिंता
बीजापुर। जिले में पंचायतों में विकास कार्यों के लिए आवंटित राशि के उपयोग और सूचना के अधिकार के तहत जानकारी उपलब्ध कराने को लेकर प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। चिन्नाकवाली ग्राम पंचायत से जुड़े मामले में अब 15वें वित्त योजना की राशि के कथित बंदरबांट और वास्तविक ठेकेदार को भुगतान नहीं किए जाने के आरोप भी सामने आए हैं।
मामले में आरोप है कि ग्राम पंचायत की राशि से अन्य ग्राम पंचायतों में हैंडपंप खनन जैसे कार्य कराए गए। वहीं संबंधित कार्यों की राशि के भुगतान और उसके वास्तविक हितग्राही/ठेकेदार को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि जिला पंचायत सदस्य और पंचायत सचिव के बीच कथित सांठगांठ के चलते पंचायत की विकास राशि के उपयोग में पारदर्शिता नहीं बरती गई।
आरटीआई में मांगी गई जानकारी भी नहीं मिली
चिन्नाकवाली ग्राम पंचायत से संबंधित वित्तीय कार्यों, स्वीकृति, तकनीकी प्रक्रिया, भुगतान और कार्यों के दस्तावेजों की जानकारी सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई थी। प्रथम अपीलीय अधिकारी द्वारा 10 अगस्त को संबंधित पंचायत को जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए जाने के बावजूद अब तक पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराए जाने का आरोप है।
ऐसे में सवाल उठता है कि जब प्रथम अपीलीय अधिकारी द्वारा स्पष्ट निर्देश दिए गए थे, तो उसके बाद भी आवेदक को जानकारी क्यों नहीं मिली? क्या पंचायत स्तर पर रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है या फिर जानबूझकर जानकारी रोकी जा रही है?
15वें वित्त की राशि के भुगतान पर उठे सवाल
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि 15वें वित्त योजना के तहत स्वीकृत राशि से कराए गए कार्यों का भुगतान वास्तविक ठेकेदार को नहीं किया गया। यदि भुगतान किसी अन्य व्यक्ति या माध्यम से किया गया है, तो उसकी प्रक्रिया, बिल-वाउचर, माप पुस्तिका, तकनीकी स्वीकृति, कार्यादेश और भुगतान आदेश की जांच आवश्यक हो जाती है।
आरोपों की वास्तविकता सामने लाने के लिए यह जांच जरूरी है कि किस पंचायत के नाम से कितनी राशि स्वीकृत हुई, किस कार्य के लिए राशि निकाली गई, कार्य वास्तव में कहां कराया गया और भुगतान आखिर किसके खाते में किया गया।
जिला पंचायत सदस्य की भूमिका की भी जांच की मांग
मामले में जिला पंचायत सदस्य की भूमिका को लेकर भी आरोप लगाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना बाकी है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि पंचायत सचिव और जनप्रतिनिधि की मिलीभगत से राशि का उपयोग किया गया है तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
उठते सवाल
चिन्नाकवाली पंचायत की राशि से अन्य पंचायतों में कार्य क्यों कराया गया?
15वें वित्त की राशि का वास्तविक उपयोग कहां और किस कार्य में हुआ?
कार्य कराने वाले वास्तविक ठेकेदार को भुगतान क्यों नहीं किया गया?
भुगतान किसके नाम और किस आधार पर किया गया?
प्रथम अपीलीय अधिकारी के आदेश के बाद भी आरटीआई की जानकारी लंबित क्यों है?
क्या पूरे मामले में पंचायत सचिव और संबंधित जनप्रतिनिधि की भूमिका की जांच होगी?
अब निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों, पंचायत पदाधिकारियों एवं अन्य जिम्मेदार लोगों की भूमिका तय कर राशि की वसूली और नियमानुसार कार्रवाई की मांग तेज हो सकती है। फिलहाल पूरे मामले में प्रशासनिक जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होसकेगी।

जिले में पंचायतों में विकास कार्यों के लिए आवंटित राशि के उपयोग और सूचना के अधिकार के तहत जानकारी उपलब्ध कराने को लेकर प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। चिन्नाकवाली ग्राम पंचायत से जुड़े मामले में अब 15वें वित्त योजना की राशि के कथित बंदरबांट और वास्तविक ठेकेदार को भुगतान नहीं किए जाने के आरोप भी सामने आए हैं।

मामले में आरोप है कि ग्राम पंचायत की राशि से अन्य ग्राम पंचायतों में हैंडपंप खनन जैसे कार्य कराए गए। वहीं संबंधित कार्यों की राशि के भुगतान और उसके वास्तविक हितग्राही/ठेकेदार को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि जिला पंचायत सदस्य और पंचायत सचिव के बीच कथित सांठगांठ के चलते पंचायत की विकास राशि के उपयोग में पारदर्शिता नहीं बरती गई।

आरटीआई में मांगी गई जानकारी भी नहीं मिली

चिन्नाकवाली ग्राम पंचायत से संबंधित वित्तीय कार्यों, स्वीकृति, तकनीकी प्रक्रिया, भुगतान और कार्यों के दस्तावेजों की जानकारी सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई थी। प्रथम अपीलीय अधिकारी द्वारा 10 अगस्त को संबंधित पंचायत को जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए जाने के बावजूद अब तक पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराए जाने का आरोप है।

ऐसे में सवाल उठता है कि जब प्रथम अपीलीय अधिकारी द्वारा स्पष्ट निर्देश दिए गए थे, तो उसके बाद भी आवेदक को जानकारी क्यों नहीं मिली? क्या पंचायत स्तर पर रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है या फिर जानबूझकर जानकारी रोकी जा रही है?

15वें वित्त की राशि के भुगतान पर उठे सवाल

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि 15वें वित्त योजना के तहत स्वीकृत राशि से कराए गए कार्यों का भुगतान वास्तविक ठेकेदार को नहीं किया गया। यदि भुगतान किसी अन्य व्यक्ति या माध्यम से किया गया है, तो उसकी प्रक्रिया, बिल-वाउचर, माप पुस्तिका, तकनीकी स्वीकृति, कार्यादेश और भुगतान आदेश की जांच आवश्यक हो जाती है।

आरोपों की वास्तविकता सामने लाने के लिए यह जांच जरूरी है कि किस पंचायत के नाम से कितनी राशि स्वीकृत हुई, किस कार्य के लिए राशि निकाली गई, कार्य वास्तव में कहां कराया गया और भुगतान आखिर किसके खाते में किया गया।

जिला पंचायत सदस्य की भूमिका की भी जांच की मांग

मामले में जिला पंचायत सदस्य की भूमिका को लेकर भी आरोप लगाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना बाकी है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि पंचायत सचिव और जनप्रतिनिधि की मिलीभगत से राशि का उपयोग किया गया है तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

उठते सवाल

चिन्नाकवाली पंचायत की राशि से अन्य पंचायतों में कार्य क्यों कराया गया?

15वें वित्त की राशि का वास्तविक उपयोग कहां और किस कार्य में हुआ?

कार्य कराने वाले वास्तविक ठेकेदार को भुगतान क्यों नहीं किया गया?

भुगतान किसके नाम और किस आधार पर किया गया?

प्रथम अपीलीय अधिकारी के आदेश के बाद भी आरटीआई की जानकारी लंबित क्यों है?

क्या पूरे मामले में पंचायत सचिव और संबंधित जनप्रतिनिधि की भूमिका की जांच होगी?

अब निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों, पंचायत पदाधिकारियों एवं अन्य जिम्मेदार लोगों की भूमिका तय कर राशि की वसूली और नियमानुसार कार्रवाई की मांग तेज हो सकती है। फिलहाल पूरे मामले में प्रशासनिक जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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