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जिले के सभी पंचायतों में मनाया गया राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस राज्य के प्रथम नक्सल सदस्य मुक्त पंचायत बड़ेसेट्टी के कार्यक्रम में शामिल हुए कलेक्टर ध्रुव सुकमा जिले में 70 अटल पंचायत डिजीटल सुविधा केन्द्र प्रारंभ

राजू तोले

  सुकमा बस्तर के माटी समाचार प्रति वर्ष 24 अप्रैल को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस मनाया जाता है। यह दिन भारत में ग्राम स्वराज की भावना को सशक्त करने और लोकतंत्र को जमीनी स्तर तक पहुँचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जाता है। कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव के निर्देशन एवं जिला पंचायत सीईओ श्रीमती नम्रता जैन के मार्गदर्शन में आज जिले की समस्त ग्राम पंचायतों में राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर विशेष ग्राम सभा का आयोजन किया गया। कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव राज्य के प्रथम नक्सल सदस्य मुक्त पंचायत बड़ेसेट्टी में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर सुकमा विकासखंड के ग्राम पंचायत झापरा में जिलास्तरीय कार्यक्रम संपन्न हुआ। कार्यक्रम जॉइंट कलेक्टर डॉ सूरज कश्यप और जनपद सूरी सुश्री मधु तेता के मुख्य अतिथ्य में संपन्न हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मधुबनी, बिहार से प्रसारित वर्चुअल संबोधन के साथ हुई, जिसे ग्राम पंचायत के जनप्रतिनिधियों, ग्रामीण जन, अधिकारी एवं कर्मचारियों ने एक साथ देखा और सुना। प्रधानमंत्री मोदी के विचार ने ग्रामीण विकास की दिशा में नई प्रेरणा दी। ग्राम सभा के दौरान पंचायत सचिव द्वारा उपस्थित ग्रामीण जनों को एजेंडा बिंदुवार जानकारी दी गई, जिसमें विकास योजनाओं से लेकर पंचायत की भूमिका तक की विस्तृत जानकारी साझा की गई। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा अटल पंचायत डिजिटल सुविधा केंद्र का उद्घाटन किया गया। इस सुविधा केंद्र के माध्यम से अब ग्रामीण जनों को बैंकिंग, सरकारी योजनाओं की जानकारी, दस्तावेजों की ऑनलाइन सेवाएं एवं अन्य डिजिटल सुविधाएं ग्राम पंचायत स्तर पर ही सुलभ होंगी। इस अवसर पर जल संरक्षण एवं जल संवर्धन, एक राष्ट्र-एक चुनाव जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जागरूकता फैलाते हुए सभी उपस्थित जनों ने स्वच्छता की शपथ भी ली।

छत्तीसगढ़ का सुकमा ज़िला, इस लोकतांत्रिक प्रक्रिया का एक सशक्त उदाहरण है। सुकमा ज़िले में कुल 160 ग्राम पंचायतें हैं, जो स्थानीय शासन की इकाइयों के रूप में कार्य करती हैं। इन पंचायतों का संचालन ग्रामीणों द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों के माध्यम से होता है। पंचायतें न केवल विकास कार्यों का संचालन करती हैं बल्कि ग्रामीणों की समस्याओं का स्थानीय स्तर पर समाधान भी करती हैं। हाल ही में, फरवरी 2025 में सुकमा ज़िले में पंचायती चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न हुए। यह चुनाव प्रक्रिया लोकतंत्र की असली परीक्षा होती है क्योंकि इसमें आम नागरिक सीधे रूप से भाग लेते हैं। ग्राम पंचायत स्तर से लेकर जिला पंचायत तक, सभी स्तरों पर प्रतिनिधियों का चुनाव हुआ। इनमें पंच, सरपंच, जनपद सदस्य और जिला पंचायत अध्यक्ष जैसे पद शामिल हैं। इस बार चुनाव में महिलाओं की भागीदारी उल्लेखनीय रही, जो सामाजिक समरसता और लैंगिक समानता की ओर एक सकारात्मक संकेत है।

सुकमा ज़िले की पंचायतें राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के मूल संदेश “गांव की सरकार, गांव के द्वार” को साकार कर रही हैं। आने वाले समय में भी ये संस्थाएं लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ ग्रामीण विकास को मजबूती प्रदान करती रहेंगी।

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