कन्या आश्रम शाला में शिष्यवृत्ति घोटाला, पत्रकार द्वारा आरटीआई लगाने पर अधिकारियों ने की एक तरफा कार्रवाई, सूचना के बदले मांगा अवैध शुल्क।
बस्तर की माटी समाचार के संपादक ने मांगी थी शिष्यवर्ती वह साबुन तेल वितरण की पंजीयन लेकिन सहायक आयुक्त ने अनुपस्थित का बहाना बनाकर आरटीआई कानून को रौंदा
बीजापुर बस्तर के माटी समाचार :– छत्तीसगढ़ प्रदेश के बीजापुर जिले में आदिवासी बालिकाओं के कल्याण से जुड़े योजनाओं का हिसाब मांगने वाले पत्रकार को प्रशासन ने झूठ लाने की कोशिश की है बस्तर के प्रतिष्ठित बस्तर के माटी समाचार के संपादक घनश्याम यादव ने स्थित कन्या माध्यमिक आश्रम शाला से शिष्यवर्ती व साबुन तेल वितरण पंजीयन मांगी थी लेकिन अधिकारियों ने न सिर्फ सूचना देने से इनकार किया बल्कि ₹5 प्रति पृष्ठ का अवैध शुल्क भी थोप दिया
घटनाक्रम की झलक:-
12 फरवरी 2025 – जन सूचना अधिकारी को आरटीआई आवेदन दिया जिसमें जुलाई 2023 से जनवरी 2025 तक के शिष्यवृत्ति वितरण रिकॉर्ड मांगे गए आवेदन शुल्क के रूप में गैर न्यायिक स्टांप जमा किया गया
19 मार्च 2025 तक एक महीना पूर्ण होने के बाद सूचना न मिलने पर सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग के समक्ष प्रथम अपील दायर की गई
28 में 2025 को अपील दायर करने के 2 महीने बाद सुनवाई का नोटिस मिला 28 में 2025 को अपीलकर्ता किसी कारणवश अनुपस्थित रहा। इसी अनुपस्थिति का हवाला देते हुए सूचना देने से इनकार कर दिया गया जबकि आश्रम अधीक्षिका ने ₹5 प्रति पृष्ठ का गैर कानूनी नोटिस जारी कर भेजा है
धारा 7(3) छत्तीसगढ़ में अधिकतम शुल्क ₹2 प्रति पृष्ठ है ₹5 की मांग अवैध है
धारा 7(1) सूचना 30 दिनों में देना अनिवार्य था लेकिन 107 दिन बीत जाने पर भी जानकारी नहीं दी गई
धारा 19(6) प्रथम अपील का निपटारा 30 से 45 दिनों में होना चाहिए था लेकिन 70 दिन लगाए गए
अनुपस्थिति का बहाना- अपील करता की गैर मौजूदगी में अधिकारी को मामले की यथास्थिति पर फैसला देना था ना की सूचना रोकना
अब सवाल यह उठता है कि क्या आश्रम में बालिकाओं को मिलने वाली छात्रवृत्ति या मिलने वाला सामान का पैसा गबन हुआ है?
क्यों आदिवासी विभाग सूचना छिपा रहा है? बड़ा सवाल है

