बीजापुर में भ्रष्टाचार का खुलासा: स्वच्छ भारत मिशन कर्मचारी ने पत्नी के नाम से 15वें वित्त आयोग की राशि हड़पी!
घनश्याम यादव| बीजापुर बस्तर के माटी छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ प्रदेश के आदिवासी बहुल बीजापुर जिले में केंद्र सरकार की 15वें वित्त आयोग की ग्रामीण विकास योजना के तहत आवंटित करोड़ों रुपये की राशि में व्यापक भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार, जनपद कार्यालय में पदस्थ स्वच्छ भारत मिशन के कर्मचारी ईश्वर गोरला ने अपनी पत्नी के नाम पर फर्जी ठेकेदारी करते हुए योजना की राशि में सेंध लगाई है।
ईश्वर गोरला स्वीकार किया कि वह अपनी पत्नी के नाम पर बिल बनाते हैं और 15वें वित्त योजना के अंतर्गत कार्यों का ठेका लेते हैं और चचेरे भाई काम को अंजाम देते हैं
उनके दावे के विपरीत कोई ड्रिलिंग मशीन न होने के बावजूद हैंडपंप खनन जैसे कार्यों की ठेकेदारी दिखाई गई।

संसाधन विहीन कार्य
हैंडपंप खनन के लिए विशेष ड्रिलर मशीन आवश्यक है, जो ईश्वर गोरला के पास नहीं है। सवाल उठता है “बिना मशीन के खनन कैसे हुआ?”
कहीं फर्जी काम दिखाकर करोड़ों रुपये तो नहीं हड़पे गए।
जब ईश्वर गोरला से इस विषय में पूछा गया, तो उन्होंने कहा:”जहाँ शिकायत करना हो, कर सकते हो। हमने काम किया है।”

आदिवासियों के विकास की धनराशि लूटी गई
बीजापुर जिले की 70% आबादी आदिवासी है। 15वें वित्त आयोग की राशि विशेष रूप से इनके जल स्रोतों, बुनियादी ढाँचे और कल्याण के लिए आवंटित की जाती है। केंद्र सरकार ने इस राशि को सीधे ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित किया है ताकि स्थानीय जरूरतें पूरी हों। लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों की सांठगांठ से यह धन भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है जिससे योजना का उद्देश्य ध्वस्त हो गया ।
आपको बता दें कि छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव दो चरणों मेंहए थे पहले चरण 7 नवंबर 2023 को और दूसरा चरण 17 नवंबर 2023 को हुआ था। 13 दिसंबर 2023 को राज्य के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। बड़ी बात यह है कि ग्राम पंचायत बोरजे में ईश्वर गोरला की फर्म GURLA CONSTRUCTION AND GENERAL के नाम पर 27 दिसंबर 2024 को वर्मी कंपोस्ट के नाम पर₹20 हजार रुपए 15 वित्त योजना से आहरण कर लिया गया।
जबकि कांग्रेस के शासनकाल में वर्मी कंपोस्ट काकाम चलता था। ईश्वर गोला ने बीजेपी के शासनकाल में वर्मीकपोस्ट के नाम पर फर्जी बिल बनाकर 15व वित्त योजना की राशि में सेंध लगाया है। यह मामला सरकारी योजनाओं में पनप रहे भ्रष्टाचार की पोल खोलता है। बीजापुर जैसे पिछड़े इलाकों में, जहाँ पेयजल तक की सुविधा नहीं है, विकास राशि की यह लूट आदिवासी समुदाय के अधिकारों का हनन है। अब देखना है कि प्रशासन कितनी तेजी से दोषियों को कठघरे में खड़ा करता है।
ग्राम पंचायतों के वित्तीय रिकॉर्ड्स की तत्काल जाँच होनी चाहिए, खासकर उन ठेकों की जहाँ गोरला की पत्नी को भुगतान किया गया।
ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर अपलोड किए गए बिलों और वास्तविक कार्यों का सत्यापन जरूरी है।
लोकपाल या राज्य सतर्कता आयोग द्वारा विशेष जाँच की माँग उठ रही है।

