नशे में शिक्षा! तेतलपारा के शासकीय स्कूल में बच्चों का भविष्य दांव पर,विभाग की सिस्टम में लगी जंग।
बस्तर की माटी न्यूज़ (BKM NATIONAL NEWS),गरियाबंद
तेतल पारा स्कूल का सच_ “नशे” में डूबा प्रधान पाठक और भगवान भरोसे 122 बच्चों का भविष्य।
शासकीय स्कूलों में बच्चों के भविष्य के साथ किस तरह का खिलवाड़ हो रहा है, इसकी जीती-जागती तस्वीर मैनपुर ब्लॉक के तेतलपारा प्राथमिक शाला में देखी जा सकती है। 122 बच्चों के यह स्कूल आज भी पूरी तरह भगवान भरोसे चल रहा है। जर्जर भवन,एक ही बरामदे में पढ़ाई,और सबसे बड़ा कलंक –प्रधान पाठक का “नशे” में डूबा रहना।

जर्जर भवन और बरामदे में पढ़ाई
तेतलपारा प्राथमिक शाला का हाल देखकर लगता है कि यह कोई परित्यक्त सराय हो। स्कूल भवन के दो कमरे पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं। बच्चों की पढ़ाई,खेलकूद और मध्यान्ह भोजन – सब कुछ एक ही बरामदे में होता है। न बैठने की सुविधा,ना ही कोई सुरक्षा का इंतजाम। बारिश हो या गर्मी, बच्चों को दिनभर इस असुरक्षित बरामदे में ही रहना पड़ता है।
प्रधान पाठक नशे में धुत,स्कूल में गैरहाजिर!
02 जुलाई शनिवार को जब मीडिया की टीम स्कूल पहुंची, तो प्रधान पाठक देवनारायण सिंह स्कूल में मौजूद नहीं थे। सुबह 10 से शाम 4 बजे तक स्कूल खुला रहना चाहिए, लेकिन मास्टर साहब अपने घर पर थे। जब गांव के किसी व्यक्ति ने उन्हें बुलाकर स्कूल लाया, तो वे नशे की हालत में लड़खड़ा रहे थे।
पत्रकारों से आईडी दिखाने और बिना परमिशन मांगे कुर्सी पर बैठने के बात कहने, जैसी हरकतें कर उन्होंने अपनी स्थिति खुद मीडिया को बयां कर दी। जब नशे में स्कूल आने पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने स्वयं को ‘आदिवासी होने’ का अधिकार बताकर ड्यूटी के समय भी शराब पीने को जायज ठहराने की बात की। सवाल यह है –
क्या आदिवासी होना किसी शिक्षक को बच्चों का भविष्य बर्बाद करने की छूट देता है?

सबसे हैरान करने वाली बात ये है कि प्रधान पाठक खुद अपना ब्लॉक शिक्षा अधिकारी का नाम, प्रदेश के मुख्यमंत्री, राज्यपाल का नाम के साथ देश के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति का नाम तक नहीं जानते।
तो सवाल उठता है –
जब मास्टर को खुद का होश नहीं, तो वो बच्चों को क्या पढ़ाएगा और उनके भविष्य कैसे सँभालेगा?
पत्रकारों के द्वारा जब प्रधान पाठक को अपने द्वारा पढ़ाया जाने वाले विषय के बारे में कहा गया तो, बच्चों का बुक लेकर सीधा चैप्टर 7 से अपने ही ढंग में शुरुआत कर दी sky is falling और लड़खड़ाते हुए उक्त चैप्टर की विषय मेंसमझने भी लग गए, लेकिन ताज्जुब की बात यह था कि, जिस समय वो पढ़ा रहे थे सभी बच्चों की मुंह उल्टा दिशा पर दूसरे ब्लैकबोर्ड की तरफ था । तो इससे आप समझ सकते हैं कि वो कीसको पढा रहे थे बच्चों को या पत्रकारों को !
पालक समिति भी परेशान:
विद्यालय की पालक समिति के अध्यक्ष महेंद्र कुमार नागेश का कहना है –
“प्रधान पाठक कब आते हैं और कब जाते हैं, हमें भी पता भी नहीं चलता। जब भी आते हैं, नशे में होते हैं और बस दस्तखत करके चले जाते हैं। बच्चों को पढ़ाना तो भूल ही जाइए।”
समिति ने पहले भी शिकायत की, लेकिन खंड शिक्षा अधिकारी ने सिर्फ 15 दिन में कार्रवाई का आश्वासन दिया और अब तक कुछ नहीं हुआ।
बच्चों पर कहर और विभाग के सिस्टम की बेरुखी-
बच्चों की हालत सबसे खराब है। जर्जर बरामदे में पढ़ाई, खेलने की जगह नहीं, और मास्टर की शराबखोरी के कारण शिक्षा ठप। जब बच्चों से प्रधान पाठक के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने साफ कहा –
“शिक्षक रोज नशे में आते हैं।”
इतना सुनते ही प्रधान पाठक ने बच्चों को पत्रकारों के सामने ही डांटना शुरू कर दिया।

जब इस पर ब्लॉक शिक्षा अधिकारी महेश कुमार पटेल से सवाल किया गया, तो उन्होंने सिर्फ इतना कहा –
“ग्रामीणों और पालक समिति ने लिखित शिकायत भी की है। जांच करवाएंगे।”
यानी पूरा सिस्टम सिर्फ जांच के हवाले है।
मैनपुर ब्लॉक में शिक्षा की हालत बदतर!
तेतलपारा ही नहीं, मैनपुर ब्लॉक के 40-45 स्कूल भवन अति जर्जर हैं। कहीं बच्चे तबेलों में पढ़ते हैं, तो कहीं पंचायत भवन और बरामदों में शिक्षा संचालन किया जा रहा है। सरकार के स्मार्ट एजुकेशन और नशा मुक्ति अभियान कागजों में ही सीमित रह गए हैं।
निर्माण एजेंसियों और विभाग की गुणवत्ता पर भी सवाल उठता है। 10-12 साल में ही सरकारी भवन जर्जर हो जाते हैं। कुछ अतिरिक्त भवन बनाए भी गए, तो वहां कहीं गोवंश कब्जा जमाए हैं,तो कहीं नशाखोरों का अड्डा बन गया है। दरवाजे-खिड़की अधूरी,लेंटर की ढलाई होते ही नाम आदि रंग दी जाती है।
सबसे बड़ा सवाल?
तेतलपारा का यह तस्वीर शिक्षा विभाग के कागजी दावों की पोल खोल रही है। सवाल यह है –
क्या नशे में डूबा “प्रधान पाठक” बच्चों का भविष्य बना सकता है?
क्या सिर्फ जांच का हवाला देकर विभाग अपनी जिम्मेदारी पूरी कर लेगा?
क्या सामने की पीढ़ी इसी ‘स्मार्ट शिक्षा’ से आगे बढ़ेगी या राजस्थान के झाला वाड़ हादसे का पुनःइंतजार है?
तेतलपारा प्राथमिक शाला आज प्रदेश के लिए आईना है। यह सिर्फ एक स्कूल नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र नशे में धुत हकीकत है। जब तक जिम्मेदार जागेंगे नहीं, बच्चों का भविष्य सिस्टम की बेरुखी और मास्टर की शराबखोरी के बीच बच्चों का भविष्य पीसता रहेगा।

