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DAV स्कूल की प्रिंसिपल के नए कारनामे आ रहे सामने विधवा महिला को कहा ‘डायन’, बच्चे को स्कूल से निकाला कहा इस स्कूल में पढ़ने तुम्हारी औकात नहीं

घनश्याम यादव सम्पादक

दंतेवाड़ा बस्तर के माटी समाचार दंतेवाड़ा बचेली डीएवी स्कूल की प्रिंसिपल चेतना शर्मा नित्य नये नए विवादों में घिरती जा रही हैं। इस बार आरोप है कि उन्होंने एक विधवा महिला और उसके बेटे के साथ अमानवीय व्यवहार किया, जिससे बच्चा सदमे में चला गया और स्कूल छोड़ने को मजबूर हो गया।

क्या है मामला?

सोनादि भास्कर, जिनके पति की मृत्यु 5 वर्ष पूर्व हो चुकी है, बाजार में सब्जी बेचकर अपने तीन बच्चों का पालन-पोषण करती हैं। उनका एक बेटा DAV स्कूल में पढ़ता था। बच्चे को एक विषय में सप्लीमेंट्री आई, जिसके बाद मां स्कूल में प्रिंसिपल से मिलीं और हाथ जोड़कर निवेदन किया कि आर्थिक स्थिति खराब है, कृपया बच्चे को दोबारा पढ़ने का अवसर दिया जाए। स्कूल की शिक्षिकाओं ने भी बच्चे का फेवर किया था।

प्रिंसिपल का अमानवीय जवाब

सोनादि के अनुसार, प्रिंसिपल चेतना शर्मा ने न सिर्फ़ बच्चे को स्कूल से निकाल दिया, बल्कि मां के सामने ही बच्चे को कहा –
“तुम्हारी औकात नहीं है इस स्कूल में पढ़ने की।”
इतना ही नहीं, महिला को अपमानित करते हुए प्रिंसिपल ने कहा –
“तुम डायन हो, बच्चे पैदा करके हमें सौंप देती हो, पालना आता नहीं है।”
टीसी (स्थानांतरण प्रमाण पत्र) भी कथित रूप से माँ के ऊपर फेंक दी गई।

बच्चे पर मानसिक असर

इस घटनाक्रम के बाद बच्चा गहरे सदमे में चला गया है और अब किसी भी स्कूल में एडमिशन लेने से इंकार कर रहा है। माँ का कहना है कि बच्चे ने माँ का अपमान अपनी आँखों से देखा, जिससे उसका आत्मविश्वास टूट गया है।

बच्चे ने बीते दिन स्कूल में हुए हंगामे के बीच आकर अपने साथ हुए इस अत्याचार की शिकायत NMDC प्रबंधन के आए हुए अधिकारियों के सामने कही।

अधिकारियों ने बच्चे का एडमिशन दोबारा करवाने का आश्वासन दिया था।

शिक्षकों ने प्रिंसिपल के खिलाफ कल खोला था मोर्चा।

प्रिंसिपल स्टाफ के साथ दुर्व्यवहार करती
मानसिक रूप से बीमार होने के बावजूद प्रिंसिपल जिम्मेदार पद पर बनी हुई हैं।

शिक्षकों ने स्कूल प्रबंधन से प्रिंसिपल को हटाने की मांग की। मामला बढ़ता देख NMDC प्रबंधन को मध्यस्थता में आना पड़ा, और आश्वासन देने के बाद ही शिक्षकों ने काम पर वापसी की।

प्रिंसिपल ने कहा – डिप्रेशन की दवा चल रही है

जब मीडिया और जनप्रतिनिधियों ने प्रिंसिपल से बात करने की कोशिश की, तो उन्होंने कहा –
“मैं मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं हूँ, मेरी डिप्रेशन की दवाई चल रही है, बात नहीं कर सकती।”

प्रशासन से सवाल

अब सवाल उठता है कि अगर प्रिंसिपल मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं, तो उन्हें इतने संवेदनशील पद पर क्यों रखा गया है?
क्या एक विधवा महिला और उसके बच्चे के आत्मसम्मान की कोई कीमत नहीं?

क्या कहता है बाल अधिकार कानून?

कानूनन किसी भी बच्चे को जाति, धर्म, वर्ग या आर्थिक स्थिति के आधार पर अपमानित करना पूर्णतः अवैध है।
बाल अधिकार कार्यकर्ता इस पूरे प्रकरण को बाल संरक्षण आयोग और मानवाधिकार आयोग तक ले जाने की मांग कर रहे हैं।

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