भ्रष्टाचार के खिलाफ़ खबर या खबरों के खिलाफ़ साजिश?असली पत्रकारों की साख को धूमिल करना उद्देश्य
घनश्याम यादव प्रधान संपादक बस्तर के माटी समाचार
बीजापुर। पत्रकारिता को समाज का आईना कहा जाता है, लेकिन क्या हो जब इसी आईने को गंदे हाथों से धुंधला करने की कोशिश की जाए? बीजापुर जिले के भोपालपटनम विकासखंड में ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां भ्रष्टाचार की खबरें उजागर करने वाले पत्रकारों के खिलाफ एक साजिश के तहत फर्जी और विवादास्पद वीडियो वायरल किए जा रहे हैं।

यह साजिश का आरूप क्यों ले रहा है, इसकी कहानी शुरू होती है ग्राम पंचायत वाडला के पूर्व सचिव हरि गोपाल पेंदम से। 14वें और 15वें वित्त आयोग की राशि के गबन के मामले में उन पर कार्रवाई हो चुकी है और उन्हें निलंबित किया जा चुका है।
लेकिन अब, ग्राम पंचायत गुंलापेटा में एक बार फिर उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के नए आरोप सामने आए हैं। जब स्थानीय पत्रकारों ने इस मामले को उजागर किया, तो आरोप है कि बिफरे हरि गोपाल ने एक फर्जी पत्रकार को बुलाया और उन खबरों का ‘खंडन’ करने वाली वीडियो बनवाकर वायरल करवाई जा रही हैं। इन वीडियोज का एकमात्र मकसद असली पत्रकारों की साख को धूमिल करना और जनता की नजरों में सच्चाई को तोड़-मरोड़ कर पेश करना बताया जा रहा है।
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सवाल यह उठता है कि क्या यह एक सुनियोजित कोशिश है ताकि गंभीर भ्रष्टाचार के मामलों की जांच रुक सके? अगर हरि गोपाल पर लगे ये नए आरोप सही पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ न सिर्फ दुबारा निलंबन, बल्कि बर्खास्तगी तक की कार्रवाई हो सकती है।
यह मामला सिर्फ एक अधिकारी के भ्रष्टाचार तक सीमित नहीं रह गया है। यह पत्रकारिता की स्वतंत्रता और सच्चाई को दबाने की एक खतरनाक साजिश का संकेत देता है। जनता के मन में यह सवाल पैदा हो रहा है कि क्या उन्हें सच्चाई दिखाई दे पा रही है या सिर्फ वही दिखाया जा रहा है जो कुछ लोग चाहते हैं?
इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग अब जोर पकड़ रही है। सच क्या है और साजिश क्या, यह तो जांच ही तय करेगी।

