भाजपा सरकार नक्सल-मुक्त बस्तर में उद्योगपतियों को संरक्षण दे रही है: कांग्रेस का आरोप
पुलिस ने रोका कांग्रेस जांच दल, तो पीड़ित ग्रामीण नदी पार कर स्वयं पहुंचे व्यथा सुनाने
प्रधान संपादक घनश्याम यादव
बीजापुर बस्तर के माटी समाचार, 05 नवंबर, 2025: छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के भैरमगढ़ ब्लॉक में रायपुर के एक उद्योगपति द्वारा 127 एकड़ से अधिक निजी जमीन पर कब्जे के आरोपों की जांच के लिए रवाना हुआ कांग्रेस का एक उच्च-स्तरीय जांच दल बुधवार को पुलिस के रोकने के कारण प्रभावित गांवों तक नहीं पहुंच सका। इसके बाद, पीड़ित ग्रामीणों ने स्वयं इंद्रावती नदी पार करके जांच समिति के सामने अपनी व्यथा रखी।

यह जांच दल छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज के निर्देश पर गठित किया गया था। आरोप है कि भैरमगढ़ ब्लॉक के ग्राम बैल, धरमा, मरकापाल और बड़ेपल्ली के ग्रामीणों की 120 एकड़ से अधिक निजी जमीन पर रायपुर के उद्योगपति महेंद्र गोयनका और उनकी पत्नी मीनू गोयनका ने कब्जा कर रखा है।
जांच दल को पुलिस ने रोका

नौ सदस्यीय इस जांच समिति के संयोजक केशकाल विधायक एवं विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष संतराम नेताम हैं। समिति के अन्य सदस्यों में बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी, चित्रकोट के पूर्व विधायक राजमन बेंजाम सहित कई जनप्रतिनिधि शामिल हैं।

जांच दल जब बुधवार को प्रभावित गांवों का दौरा करने रवाना हुआ, तो पुलिस ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए उन्हें इंद्रावती नदी पार करने की अनुमति नहीं दी। इस पर पीड़ित ग्रामीण स्वयं नदी पार करके भैरमगढ़ ब्लॉक के इतामपार पंचायत स्थित उस्परी घाट पहुंचे, जहां जांच समिति के सदस्य मौजूद थे।
ग्रामीणों ने सुनाई व्यथा, थाने में दिया आवेदन
उस्परी घाट पर ही ग्रामीणों ने जांच समिति के सामने अपनी समस्याएं रखीं। समिति ने मौके पर मौजूद भैरमगढ़ के अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) को उद्योगपति दंपति के खिलाफ कार्रवाई और पीड़ितों की जमीन वापस दिलाने का ज्ञापन सौंपा। इसके बाद, समिति और ग्रामीण संयुक्त रूप से भैरमगढ़ थाने पहुंचे, जहां गोयनका दंपति के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज कराने और जमीन वापसी के लिए आवेदन दिया।
कांग्रेस नेताओं ने उठाए सवाल, लगाए गंभीर आरोप
इस मौके पर कांग्रेस नेताओं ने भाजपा सरकार पर जमीन की लूट में उद्योगपतियों को संरक्षण देने के गंभीर आरोप लगाए।
· संतराम नेताम ने कहा, “हम स्वयं मौके पर जाना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने सुरक्षा का हवाला देकर रोक दिया। सरकार एक ओर बस्तर को नक्सल-मुक्त घोषित करती है, दूसरी ओर पीड़ितों से मिलने से रोकती है। यह सब खनिज संसाधनों की लूट और उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए है।”
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पूर्व विधायक राजमन बेंजाम ने सवाल उठाया, “जिस रास्ते से नक्सली समर्पण कर लौटते हैं, उसी रास्ते से उद्योगपति जा रहे हैं। क्षेत्र में ऐसा क्या है जिसके लिए उद्योगपति जमीन खरीद रहे हैं?”
· विधायक विक्रम मंडावी ने सरकार पर निशाना साधते हुए पूछा, “सरकार नक्सल-मुक्त बस्तर का दावा करती है, किंतु इंद्रावती नदी के उस पार उद्योगपति ने 127 एकड़ जमीन कैसे हथिया ली? किसने बिकवाई, किसके संरक्षण में? क्या ग्राम सभा एवं शासन से अनुमति ली गई?” उन्होंने तत्काल जांच और ग्रामीणों की जमीन वापस दिलाने की मांग की।
इस पूरे घटनाक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। मामले ने बस्तर संभाग में भूमि अधिग्रहण और औद्योगिक घरानों की भूमिका को लेकर एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है।

