*बस्तर के किसानों के साथ खुला अन्याय मक्का का समर्थन मूल्य कागज़ों में, ज़मीन पर शोषण जारी : राजू सोढ़ी*
ब्यूरो जगदलपुर

जनपद सदस्य दरभा राजू सोढ़ी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि बस्तर अंचल के मेहनतकश किसान एक बार फिर बाजार की मनमानी और सरकारों की उदासीनता के बीच पिस रहे हैं। केंद्र सरकार द्वारा खरीफ विपणन सत्र 2025-26 के लिए मक्का का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2400 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया गया है, किंतु बस्तर के अधिकांश किसानों को आज भी 1700 से 1800 रुपये प्रति क्विंटल में फसल बेचनी पड़ रही है। श्री सोढ़ी ने कहा कि यह सिर्फ बाजार की लूट नहीं, बल्कि राज्य और केंद्र दोनों सरकारों की विफलता है। शासन के पास किसानों की आय दोगुनी करने के बड़े-बड़े दावे तो हैं, लेकिन ज़मीनी सच्चाई यह है कि किसान की मेहनत का मूल्य लगातार घटता जा रहा है।
व्यापारी खुलेआम समर्थन मूल्य से कम दर पर खरीदी कर रहे हैं, पर प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह मौन है। न मंडी बोर्ड सक्रिय है, न कृषि विभाग की कोई निगरानी। उन्होंने कहा कि यह स्थिति इस बात को दर्शाती है कि व्यापारियों और सरकारी अधिकारियों के बीच सांठगांठ हो चुकी है — एक तरफ किसानों को ऊंचे दामों पर खाद, बीज और कीटनाशक बेचे जाते हैं, और दूसरी ओर उन्हीं की फसल औने-पौने दामों पर खरीदी जाती है। यह खुला आर्थिक शोषण है और बस्तर के किसानों के साथ अन्याय की पराकाष्ठा है। राजू सोढ़ी ने राज्य सरकार पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जब मुख्यमंत्री किसानों के पक्ष में बयान देते हैं, तो क्या प्रशासन को यह अधिकार नहीं कि वह समर्थन मूल्य सुनिश्चित कराए? अगर 2400 रुपये प्रति क्विंटल का मूल्य घोषित है, तो फिर किसानों को इससे कम दाम पर फसल बेचने की नौबत क्यों आ रही है ।उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन और शासन स्तर पर तत्काल कार्रवाई नहीं की गई, तो किसान संगठन सड़क पर उतरकर आंदोलन करने को विवश होंगे। हमारी मांग साफ है — मक्का का समर्थन मूल्य पूरी तरह लागू किया जाए, निगरानी समिति गठित हो, और दोषी व्यापारियों पर कार्रवाई हो। सोढ़ी ने कहा किसान सिर्फ वोट बैंक नहीं, अन्नदाता हैं। जब तक उनकी मेहनत का मूल्य नहीं मिलेगा, तब तक समृद्ध भारत विकसित भारत का सपना अधूरा रहेगा।

