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प्रतिदिन मात्र 7-8 सौ क्विंटल धान खरीदी किए जाने के लिमिट को बढ़ाने की मांग,किसान पहुंचे जिला कलेक्टर से मुलाकात करने

सत्यानंद यादव

कोण्डागांव बस्तर के माटी समाचार 08 दिसम्बर  प्रतिदिन मात्र 7-8 सौ क्विंटल धान खरीदी किए जाने के लिमिट को बढ़ाने की मांग को लेकर 8 दिसम्बर को किसान काफी संख्या में जिला कलेक्टर से मुलाकात करने पहुंचे नजर आए।
लेम्प्स मुलमुला के धान खरीदी केंद्र चिपावण्ड में 8 दिसम्बर को धान बेचने के लिए टोकन लेने पहुंचे कई ग्रामों के किसानों को यह कहकर टोकन नहीं दिया गया कि प्रतिदिन केवल 700 से 800 क्विंटल ही धान खरीदा जाएगा। उक्त बात को सुनकर चिपावण्ड, भगदेवा, उमरगांव ब, फरसगांव, कुलझर, सिंगनपुर, मोहनबेड़ा, ड़ोगर सिलाटी, तिलियाबेड़ा आदि ग्रामों के विजय सोड़ी, लक्ष्मण पोयाम, जागेष्वर नेताम, सोनसिंग पाण्डे, मयाराम नेताम, परउ राम नेताम, घासीराम, चमरा, बुधमन, षंकर नेताम, योगेष, सामलाल, नेहरु आदि किसान काफी संख्या में जिला कलेक्टर से मुलाकात करने पहुंचे, कलेक्टर के कार्यालय में नहीं होने पर आवक-जावक में लिखित आवेदन देकर पावती लेने के बाद कलेक्टर से मुलाकात करने के लिए प्रतिक्षा में बैठे रहे।
टोकन नहीं मिलने से परेषान किसानों के द्वारा कलेक्टर को सम्बोधित लिखित षिकायत पत्र में लेख किया गया है कि धान खरीदी केंद्र चिपावण्ड में बताए जा रहे 700 क्विंटल धान खरीदने के लिमिट को बढ़ाकर 2000 क्विंटल प्रतिदिन का लिमिट किया जाए ताकि अधिक से अधिक किसान अपना धान बेच सकें। वहीं किसानों ने प्रेस को यह भी बताया कि जब वे ऑन लाईन टोकन कटवाने का प्रयास करते हैं, तो टोकन नहीं कट रहा है। इसलिए धान बेचने के लिए किसानों को ऑफ लाईन टोकन देने की व्यवस्था किया जाए।
ज्ञात हो कि धान खरीदी क्रेंद चिपावण्ड ही नहीं जिले के तमाम धान खरीदी केंद्रों में भी टोकन नहीं मिलने से किसानों के परेषान हो रहे होने की सूचनाएं निरंततर प्राप्त हो रही है। इसी क्रम में लेम्प्स व धान खरीदी क्रेद लंजोड़ा में भी प्रतिदिन 800 क्विंटल धान खरीदने का लिमिट बताकर किसानों को टोकन नहीं दिए जाने की जानकारी किसान रामकुमार नेताम के द्वारा देते हुए बताया गया है कि प्रतिदिन 800 क्विंटल धान खरीदने का लिमिट के अनुसार मात्र 14 किसानों को अपना धान बेचने का टोकन दिया गया है।
जिससे ऐसा प्रतित होता है कि यदि प्रत्येक धान खरीदी केंद्रों में 700-800 क्विंटल धान बेचने का निर्धारण करने पर यदि प्रतिदिन मात्र 14 किसान अपना धान बेचेंगे तो क्या जिले के सभी किसान अपना धान निर्धारित अंतिम समय सीमा तक बेच पाएंगे ?
अब देखने वाली बात यह होगी कि जिला प्रषासन के मुख्य अधिकारी जिला कलेक्टर कोण्डागांव किसानों की ज्वलंत समस्या का समाधान कैसे और कब तक कर पाते हैं ?

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