आश्रम भवन के निर्माण में बाल श्रम के उपयोग का गंभीर मामला, ठेकेदार की गंभीर लापरवाही
बीजापुर (छत्तीसगढ़): बीजापुर जिले के भोपालपटनम विकासखंड में आदिवासी विकास विभाग द्वारा संचालित वाडला बालक आश्रम के सामने एक नए आश्रम भवन के निर्माण में बाल श्रम के उपयोग का गंभीर मामला सामने आया है। यह निर्माण कार्य 1 करोड़ 67 लाख रुपये की लागत से एक स्थानीय ठेकेदार को दिया गया है।
बेधड़क कराया जा रहा बाल श्रम
मौके पर मौजूद नाबालिग बच्चों से निर्माण कार्य कराया जा रहा था। जब इस बारे में पूछा गया, तो वहां काम कर रहे एक राज मिस्त्री ने बताया कि सभी मजदूर बास्तानार से आए हैं। हालांकि, मौके पर नाबालिग बच्चों की उपस्थिति और उनसे काम लिया जाना स्पष्ट देखा गया।

कानून का खुला खुला उल्लंघन
यह कार्य बाल श्रम (निषेध एवं नियमन) अधिनियम, 1986 का खुला उल्लंघन है। यह अधिनियम 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को किसी भी व्यवसाय या प्रक्रिया में नियोजित करने पर प्रतिबंध लगाता है। खासकर, एक सरकारी विभाग द्वारा प्रायोजित और बच्चों के कल्याण के लिए बने आश्रम के सामने ही बाल श्रम का होना गंभीर चिंता और विरोधाभास का विषय है।
यह घटना छत्तीसगढ़ के आदिवासी अंचलों में बाल श्रम की स्थिति और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में गंभीर कमियों को उजागर करती है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में कितनी गंभीरता से कार्रवाई करता है और भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।

