भैरमगढ़ आरएमएसए पोटा केबिन में आदिवासी छात्रों के साथ भेदभाव और उपेक्षा का आरोप, सब्जी मांगने पर गाली-गलौज
बीजापुर बस्तर के माटी समाचार :- जिले के भैरमगढ़ में संचालित आरएमएसए (आवासीय विद्यालय) पोटा केबिन में आदिवासी छात्रों के साथ हो रहे भेदभाव और उपेक्षापूर्ण व्यवहार की गंभीर घटना सामने आई है। यहाँ आवासीय छात्रों को नियमित रूप से हरी सब्जी नसीब नहीं हो रही है, जबकि उनके भोजन का अधिकार सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।

मात्र दो टमाटर, गाली है जवाब: छात्रोंसे प्राप्त जानकारी के अनुसार, उन्हें पर्याप्त और पौष्टिक भोजन नहीं दिया जा रहा है। हरी सब्जी के अभाव में कई बार उन्हें मात्र दो टमाटर से ही गुजारा करना पड़ता है। हैरानी की बात यह है कि जब भी छात्रों ने बेहतर खाने या सब्जी की मांग की, अधीक्षक द्वारा उन्हें डांटा-डपटा गया और गाली-गलौज तक का सामना करना पड़ा। छात्रों का आरोप है कि उनके लिए आवंटित सुविधाओं और फंड पर “डाका डाला” जा रहा है।
छात्र और कर्मचारी भी कर रहे शिकायत: इस मामलेकी पुष्टि वहां मौजूद अन्य छात्रों और यहां तक कि केबिन के चपरासी ने भी की है। उनका कहना है कि यह समस्या लंबे समय से चली आ रही है और अधीक्षक की मनमानी के चलते छात्रों का पोषण स्तर प्रभावित हो रहा है।
अधिकारी बचते रहे बयान से, दिखा रवैया उदासीन: इस गंभीर मामलेकी जानकारी जब जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) लखन लाल धनेलिया को दी गई, तो उन्होंने तत्काल अधीक्षक से फोन पर बात तो की, लेकिन कैमरे के सामने आधिकारिक बयान देने से कतराते हुए केवल इतना कहा, “अवश्य कार्रवाई की जाएगी।”
गंभीर सवाल, त्वरित कार्रवाई की मांग: यह घटनाकई गंभीर सवाल खड़े करती है:
1. क्या आदिवासी छात्रों के साथ जानबूझकर भेदभाव किया जा रहा है?
2. क्या उनके पोषण और स्वास्थ्य के लिए आवंटित धन का दुरुपयोग हो रहा है?
3. प्रशासनिक अधिकारी जवाबदेही से बचने के लिए क्यों तत्पर नहीं दिख रहे?
यह मामला केवल भोजन की कमी का नहीं, बल्कि आदिवासी बच्चों के अधिकारों और सम्मान के साथ खिलवाड़ का है। अब सभी की नजरें प्रशासन पर टिकी हैं। खबर प्रसारित होने के बाद कितनी जल्दी और कितनी कड़ी कार्रवाई होती है, यह देखना समय की मांग है। छात्र अभिभावक और सामाजिक संगठनों ने त्वरित और निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है

