आश्रम में उपेक्षा के 10 दिन: बच्चों को न तेल-साबुन, न अधीक्षक घोर लापरवाही उजागर
बीजापुर बस्तर के माटी समाचार: जिले के पापन पाल स्थित आदिवासी विभाग द्वारा संचालित बालक आश्रम में बच्चों की बुनियादी जरूरतों के साथ खिलवाड़ का गंभीर मामला सामने आया है। यहाँ रह रहे 12 आदिवासी बच्चों को लगातार 10 दिन से तेल और साबुन तक नसीब नहीं हुआ है। साथ ही, भोजन व्यवस्था में भी गड़बड़ी के आरोप लगे हैं।

छात्रों ने बताया:
रात के समय अधीक्षक चपरासी के भरोसे आश्रम छोड़कर बीजापुर शहर में निवास करते हैं। बच्चों के अनुसार, कभी सब्जी नसीब नहीं होती, तो कभी दाल गायब रहती है। आदिवासी बच्चों को उनके हाल पर छोड़कर अधीक्षक अपने निजी कार्यों में व्यस्त रहते हैं।
अधीक्षक का बचाव, संरक्षण का संदेह:
इस संबंध में अधीक्षक किशोर दुर्गम से फोन पर बात की गई, तो उन्होंने बताया कि वह फिलहाल गीदम में हैं। खबर लिखे जाने की सूचना पर उनका केवल इतना कहना था – “ठीक है, कोई बात नहीं।” गौरतलब है कि मंडल संयोजक भी दुर्गम हैं और अधीक्षक भी दुर्गम, जिससे एक स्पष्ट संदेश उत्पन्न होता है कि कार्रवाई की उम्मीद करना मुश्किल है। सवाल यह भी है कि क्या मंडल संयोजक ऐसे आश्रमों का निरीक्षण नहीं करते? क्या अधीक्षक को संरक्षण प्राप्त है?
प्रशासन ने दिया आश्वासन:
इस मामले पर सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास विभाग, देवेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि ऐसे लापरवाह अधीक्षक को हटाकर योग्य शिक्षक को प्रभार सौंपा जाएगा। उन्होंने कहा कि बच्चों को तेल-साबुन जैसी बुनियादी सुविधाएँ न देना घोर उपेक्षा है और इसकी जिम्मेदारी अधीक्षक की है।
यह मामला केवल सुविधाओं की कमी का नहीं, बल्कि आदिवासी बच्चों के प्रति संवेदनहीनता और प्रशासनिक लापरवाही का प्रतीक है। अब देखना यह है कि आश्वासन के बाद कितनी शीघ्रता से बच्चों को उनका अधिकार मिलता है और जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित होती है।

