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अश्लील नृत्य कांड_ कितने गुनहगार, कब तक मौन?

मैनपुर क्षेत्र के उरमाल में सामने आया अश्लील नृत्य कांड अब किसी एक मंच, एक रात या एक आयोजन तक सीमित नहीं रह गया है। यह मामला आज प्रशासनिक लापरवाही, मौन सहमति , सत्ता-संरक्षण और महिला सम्मान पर खुले हमले का प्रतीक बन चुका है। अब तक एक एसडीएम, चार पुलिसकर्मी और 14 आयोजन समिति के सदस्यों पर कार्रवाई जरूर हुई है, लेकिन जिस पैमाने पर यह आयोजन हुआ, उसे देखते हुए सवाल उठना लाज़मी है—क्या गुनहगार वाकई बस इतने ही हैं, या फिर जांच जानबूझकर कुछ चेहरों पर आकर रोक दी गई है?

बलि का बकरा बना एसडीएम? बाकी राजस्व व अन्य कर्मचारि waiting list में ?

सबसे पहला और गंभीर सवाल यही है कि क्या एसडीएम मैनपुर को ‘बलि का बकरा’ बनाकर पूरे सिस्टम को बचाने की कोशिश की जा रही है?
सूत्रों और ग्रामीणों का कहना है कि कार्यक्रम की अनुमति की फाइल केवल एसडीएम के टेबल से नहीं गुज़री थी, बल्कि राजस्व, पुलिस और अन्य संबंधित विभागों के दफ्तरों से होकर निकली थी। यदि अनुमति प्रक्रिया सामूहिक थी, तो फिर कार्रवाई का दायरा सिर्फ एक अधिकारी तक क्यों सिमटा? बाकी अफसरों की भूमिका पर प्रशासनिक चुप्पी क्या किसी साजिश की ओर इशारा नहीं करती? या बाकियों का नंबर भी बहुत जल्द लगने वाला है ।

सरकारी कर्मचारी_दर्शक या भागीदार?

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक कार्यक्रम स्थल पर राजस्व, पुलिस, स्वास्थ्य, वन और बिजली विभाग के कर्मचारी भी मौजूद थे।
अब सवाल यह नहीं कि वे वहां थे, बल्कि यह है कि वे किस भूमिका में थे?
क्या सरकारी कर्मचारी अपनी जिम्मेदारियों को ताक पर रखकर अश्लील मनोरंजन का हिस्सा बने? अगर हां, तो यह सेवा नियमों का घोर उल्लंघन है। फिर कार्रवाई सिर्फ कुछ वर्दीधारियों तक सीमित क्यों?

चार दिन तक क्यों सोया प्रशासन?

कार्यक्रम चार दिन तक चलता रहा।
कार्रवाई तब हुई, जब वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए।
क्या पहले तीन दिन सब कुछ “सभ्य” था ?प्रशासन को दिखाई नहीं दिया? या फिर सब कुछ देखकर भी जानबूझकर अनदेखी की गई? यह देरी नहीं, बल्कि मौन सहमति का सबसे बड़ा सबूत है।

सरकारी स्कूल परिसर में अश्लीलता का मंच?

कार्यक्रम स्थल को लेकर दावा है कि आयोजन सरकारी हाईस्कूल के अधीनस्थ परिसर में हुआ। अगर यह सरकारी जमीन थी, तो स्कूल प्रबंधन से लिखित अनुमति कहां है? और अगर अनुमति दी गई, तो फिर हाईस्कूल प्रबंधन पर अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं? सरकारी परिसरों के दुरुपयोग पर जवाबदेही तय करना प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं तो और क्या है?

पंचायत की भूमिका पर चुप्पी क्यों?

कार्यक्रम ग्राम पंचायत उरमाल की सीमा में हुआ। तो फिर सरपंच, सचिव और रोजगार सहायक कैसे पूरी तरह पाक-साफ घोषित कर दिए गए? क्या पंचायत को कोई सूचना नहीं थी, या फिर सब कुछ जानते हुए भी आंखें मूंद ली गईं?
अगर पंचायत को जानकारी थी, तो अब तक पंचायत स्तर पर जांच क्यों नहीं?

फूल मस्ती” के नाम सुनकर भी कानून क्यों कमजोर पड़ा?

सोशल मीडिया पर ‘उड़ीसा की सनी लियोनी’ जैसे नामों से अश्लील प्रचार किया गया। भ्रामक निमंत्रण, उत्तेजक वीडियो और सोशल मीडिया के माध्यम से अश्लीलता फैलाई गई। इसके बावजूद IT Act की धारा 67, 67A, BNS 294 और IPC 354(D) जैसी सख्त धाराओं का इस्तेमाल क्यों नहीं हुआ? क्या महिला सम्मान अब सिर्फ काग़ज़ी बयान बनकर रह गया है?

अनुमति की शर्तें काग़ज़ तक सीमित? या सब कुछ दीखावट

अनुमति पत्र में 15 शर्तें थीं—अश्लीलता पर रोक, पूरे कार्यक्रम की वीडियोग्राफी, रिकॉर्डिंग विभाग में जमा करना जैसे शर्त आदर्श गए थे पर अब सवाल यह है कि वह वीडियोग्राफी कहां है? अगर रिकॉर्ड मौजूद है, तो अब तक बाकी दोषियों की पहचान क्यों नहीं हुई?

अश्लीलता देख,नोट उड़ाने वाले दर्शक कब कटघरे में आएंगे ?

अर्धनग्न नर्तकियों पर खुलेआम नोट उड़ाए गए। यह महिलाओं के सम्मान पर सीधा हमला है। क्या दोष सिर्फ नर्तकियों और आयोजकों का है? नोट उड़ाने वाले दर्शकों पर कानून कब चलेगा, या फिर उन्हें सामाजिक और प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है?

सुरक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे क्यों ?

दावा है कि तय क्षमता से चार गुना ज्यादा भीड़ थी। न अग्निशमन विभाग की अनुमति,न फायर सेफ्टी,न आपात निकासी की व्यवस्था। अगर कोई बड़ा हादसा या भगदड़ होती, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेता?

नाबालिगों की मौजूदगी_ सबसे खतरनाक पहलू

खबरों की माने तो बाल संरक्षण विभाग ने नाबालिगों की मौजूदगी की आशंका जताई है।
अगर यह सही है, तो मामला सिर्फ अश्लीलता का नहीं, बल्कि गंभीर आपराधिक अपराध का बन जाता है।
इसके बावजूद अब तक इसे बाल संरक्षण के नजरिए से गंभीरता से क्यों नहीं लिया गया?

महिलाओं का डर, समाज की चुप्पी कब तक ?

उरमाल के एक महिला का पहचान उजागर न करने की शर्त पर कहना है कि, इस कार्यक्रम ने गांव की महिलाओं की इज्जत को तार-तार कर दिया। अगर इस कार्यक्रम के बाद किसी महिला के साथ कोई अप्रिय घटना होती, तो जिम्मेदारी कौन लेता? डर, दबाव और सामाजिक चुप्पी ने इस आयोजन को बढ़ावा दिया—और यही सबसे बड़ा अपराध है।

जन प्रतिनिधियों की दो टूक मांग

जनपद सदस्य परमेश्वर मालू ने मांग की है कि—
सीसीटीवी फुटेज की जांच हो, मोबाइल सर्विलांस से सभी मौजूद लोगों की पहचान, नग्नता को बढ़ावा देने वाले और कार्यक्रम के दर्शक बने सभी सरकारी कर्मचारियों पर भी सख्त कार्रवाई ।

भाजपा नेता हलमन धुर्वा ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों ने छत्तीसगढ़ की छवि को देशभर में शर्मसार किया है और जितने भी दोषी चाहे जिस पद पर हो, उसे बख्शा नहीं जाना चाहिए।

प्रशासन का आश्वासन

अपर कलेक्टर पंकज डाहिरे का कहना है कि जांच जारी है, सभी संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और रिपोर्ट जल्द से जल्द कलेक्टर को सौपा जाएगा और उसके आधार पर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी—चाहे वह किसी भी पद या प्रभाव में क्यों न हो।

आख़िरी सवाल अब भी कायम_

यह मामला सिर्फ एक अश्लील नृत्य का नहीं है। यह प्रशासनिक चूक, मौन सहमति, सत्ता के संरक्षण और महिला सम्मान की पुनर्स्थापना की कसौटी है।
अब देखना यह है—
क्या कार्रवाई कुछ नामों तक सीमित रहेगी? या फिर यह मामला एक ऐतिहासिक उदाहरण बनेगा,
जहां पूरा सिस्टम कटघरे में खड़ा होगा
और महिलाओं के सम्मान के लिए वास्तव में कड़ा और निर्णायक फैसला लिया जाएगा?

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