बैंक ऑफ़ बड़ौदा की नई शाखा का शुभारंभ लेकिन अमलीपदर की “मोन मौजूदगी” रही चर्चा में
राष्ट्रीयकृत बैंक की दस्तक, डिजिटल सपनों का उद्घाटन और मंच से विकास के वादों की बरसात ।
बस्तर की माटी न्यूज़ (BKM NATIONAL NEWS),गरियाबंद
गोहरापदर में आज कुछ ऐसा ही नज़ारा देखने को मिला, जब Bank of Baroda की नई शाखा का विधिवत शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम में गरियाबंद कलेक्टर भगवान सिंह ऊईके,बैंक के महाप्रबंधक दिवाकर पी सिंह और पूर्व संसदीय सचिव गोवर्धन सिंह मांझी की उपस्थिति ने आयोजन को औपचारिक गरिमा प्रदान की।

मंच से घोषणा हुई—“अब 200 गांवों के लोगों को मिलेगा सीधा लाभ!”
और जैसे ही यह वाक्य गूंजा, लोगों को 18 से 20 किलोमीटर दूर देवभोग की बैंक यात्राओं से मुक्ति का सपना भी साथ ही दिखाई देने लगा।

कलेक्टर भगवान सिंह ऊईके ने अपने संबोधन में कहा कि इस शाखा के खुलने से क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। कृषि लोन, वाहन लोन, एजुकेशन लोन और होम लोन जैसी सुविधाएं अब पास में उपलब्ध होंगी। “लोगों का काम आसान होगा और समय बचेगा,” उन्होंने भरोसा दिलाया।

महाप्रबंधक दिवाकर पी सिंह ने इसे “पूरी तरह डिजिटल बैंकिंग सुविधा से लैस” बताते हुए दावा किया कि यह शाखा आधुनिक तकनीक से सुसज्जित है और ग्राहकों को अन्य बैंकों से उन्नत सेवाएं देगी। यानी अब गांवों में भी डिजिटल इंडिया का बटन दबाते ही बैंकिंग आपके हाथ में होगी।

पूर्व संसदीय सचिव गोवर्धन सिंह मांझी ने इसे लंबे समय के प्रयासों का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में राष्ट्रीयकृत बैंक खोलने की मांग वर्षों से उठ रही थी और आज वह सपना साकार हुआ है। उन्होंने क्षेत्रीय लोगों से बैंक में खाता खोलकर आर्थिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी की अपील की।
कार्यक्रम में क्षेत्रीय उप प्रबंधक ओंकारनाथ सिंह, आरबीडीएम जागेश्वर सामंत देबू, बैंक मैनेजर निगमानंद मेहर और नई शाखा के प्रबंधक हितेश कुमार साहू सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे। मंच सजा, फीता कटा, तालियां बजीं—और बैंक आधिकारिक रूप से शुरू हो गया।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती।
जहां एक ओर गोहरापदर में उत्सव का माहौल था, वहीं अमलीपदर क्षेत्र में “मौन विरोध” की चर्चा ने इस उद्घाटन को हल्का-सा रोचक रंग भी दे दिया। बताया गया कि अमलीपदर के कई आमंत्रित लोग कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए।
समाजसेवी श्रवण कुमार सतपति ने स्पष्ट कहा कि नवीन तहसील होने के बावजूद अमलीपदर में बैंक शाखा खोलने के लिए कई बार आवेदन दिए गए, लेकिन उसे नजरअंदाज कर अन्य स्थान पर शाखा खोली गई जबकि गोहरा पदर जाने वाले ज्यादातर लोग इसी क्षेत्र से ही आते हैं । अगर जाएंगे भी तो कैसे ? नदी में पुलिया तो बना ही नहीं । इसी कारण निमंत्रण मिलने के बावजूद क्षेत्र के लोगों ने कार्यक्रम में न जाकर चुपचाप विरोध दर्ज कराया।

जब इस मुद्दे पर महाप्रबंधक दिवाकर पी सिंह से सवाल पूछा गया, तो उन्होंने संतुलित जवाब दिया—“नए प्रस्ताव आएंगे तो अमलीपदर क्षेत्र में भी शाखा खोलने पर विचार किया जाएगा।”
कलेक्टर ने भी आश्वासन दिया कि आवश्यकता और प्रस्ताव के आधार पर आगे कदम उठाए जाएंगे।
यानी मंच पर उद्घाटन हुआ, भाषणों में विकास बहा, और पृष्ठभूमि में अगली मांग की पटकथा भी तैयार हो गई।
कुल मिलाकर गोहरापदर में बैंक की शाखा खुलने से निश्चित ही आसपास के 200 गांवों को राहत मिलने की उम्मीद है। लोगों को अब लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी, डिजिटल लेन-देन और सरकारी योजनाओं का लाभ भी सुगमता से मिलेगा।
पर साथ ही यह उद्घाटन यह भी याद दिलाता है कि विकास की रेखा खींचते समय हर कस्बे की अपनी आकांक्षाएं होती हैं। एक जगह तालियां बजती हैं, तो दूसरी जगह खामोशी भी संदेश दे जाती है।
अब देखना यह है कि अगली बैंक शाखा का फीता किस गांव में कटेगा—और तब तक अमलीपदर की खामोशी क्या नए प्रस्ताव में बदल पाएगी या नहीं ? या सिर्फ बैंक ऑफ़ बड़ौदा के कारपोरेट बैंक सखी जैसी झुनझुना से ही संतुष्ट होना पड़ेगा ।

