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टोइंग में टशन_ “ब्रेकडाउन” नहीं, ब्रेन डाउन निकला!

गांजा तस्करी का स्टार्टअप मॉडल ! नया फार्मूला देख, पुलिस भी है हैरान 

बस्तर की माटी न्यूज़ (BKM NATIONAL NEWS),गरियाबंद

ओडिशा से छत्तीसगढ़ की ओर बढ़ती एक “बेचारी खराब गाड़ी” ने ऐसा खेल दिखाया कि पुलिस भी माथा पकड़ बैठी। आम लोग सोचते रहे—“भैया साइड दे दो, गाड़ी खराब है!” पर असलियत में यह ब्रेकडाउन नहीं, “ब्रेक-इन” था—कानून के लिए। इमरजेंसी टोइंग सर्विस का बोर्ड, आगे टोचन की रस्सी, पीछे लटकी कार… और अंदर छुपा था पूरा “हरित भंडार”।

सीक्रेट चैंबर में ‘हरित क्रांति’_ तस्करों का देसी जुगाड़!

तस्करों ने गाड़ी में ऐसा गुप्त चैंबर बनाया था कि बड़े-बड़े फिल्मी सेट डिज़ाइनर भी शर्मा जाएं। ऊपर से सीक्रेट चैंबर, अंदर से गांजा रखने का गुप्त कमरा! बाहर से सब सामान्य—अंदर से “हरित आपूर्ति विभाग” सक्रिय।

लोगों को लगता रहा कि बेचारे की गाड़ी खराब हो गई है, लेकिन असल में गाड़ी नहीं, कानून की आंखों में धूल झोंकने की योजना “फुल स्पीड” में थी।

कहते हैं, यह फार्मूला कई दिनों से चल रहा था। टोइंग गाड़ी आगे-आगे, माल पीछे-पीछे। पुलिस की नाक के नीचे से माल ऐसे गुजरता रहा जैसे यह कोई सरकारी राहत सामग्री हो।

 

एसपी बोले—“ऐसा जुगाड़ तो कस्टम में लगना चाहिए!”
जब सोनपुर जिले से बलांगीर होते हुए छत्तीसगढ़ की सीमा पर पुलिस ने इस ‘ब्रेकडाउन ड्रामा’ का पर्दाफाश किया, तो देखने वालों की आंखें फटी रह गईं।


बताया जाता है कि मामले की जानकारी मिलते ही सोनपुर जिले के एसपी और जज तक हैरान रह गए। दांतों तले उंगलियां दबाकर बोले—“इतना क्रिएटिव दिमाग अगर सही दिशा में लगता तो देश का विकास हो जाता!”

एसपी खुद मान बैठे कि गाड़ी को देखकर कहीं से नहीं लगता था कि यह तस्करी का साधन है। बाहर से टोइंग, अंदर से “हरित गांजा एक्सप्रेस”।

पुलिस ने जब गाड़ी की तलाशी ली तो कुंटलों में गांजा बरामद हुआ। आसपास खड़े लोग यही सोचते रह गए कि यह वही गाड़ी है जिसे वे रास्ता देकर आगे बढ़ा रहे थे।

हॉलीवुड भी फेल, देसी तस्कर पास!

तस्करी की यह तकनीक देखकर सोशल मीडिया पर चर्चा छिड़ गई—“ऐसा प्लॉन तो किसी फिल्म में भी नहीं देखा!”
जहां फिल्मी निर्देशक सस्पेंस रचते हैं, वहां इन तस्करों ने असली जिंदगी में ‘सस्पेंस थ्रिलर’ बना दी। न कोई पीछा, न कोई भागदौड़—बस आराम से टोचन करते हुए माल की सप्लाई।

पर जैसा कि कहावत है—“चोरी ज्यादा दिन नहीं टिकती।”
आखिरकार पुलिस ने मास्टरमाइंड को उसी गाड़ी के साथ दबोच लिया, जिसे ढाल बनाकर वह मालामाल होने निकला था।

अब चर्चा इस बात की है कि अगर यही दिमाग किसी स्टार्टअप में लगता तो शायद ‘इनोवेशन अवार्ड’ मिल जाता। लेकिन गलत राह पर चला हुनर आखिर सलाखों के पीछे पहुंच गया।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बात तो साफ कर दी—जुगाड़ चाहे कितना भी नायाब क्यों न हो, कानून की पकड़ से बचना आसान नहीं।

टोइंग की रस्सी ने आखिरकार तस्करों की किस्मत भी “टो” कर ली—सीधे हवालात तक।

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