गोली नहीं, गिफ्ट_ जंगल में CRPF का ‘सॉफ्ट अटैक’, सिविक एक्शन से ग्रामीणों में भरोसे की नई रोशनी
बस्तर की माटीन्यूज़(BKM NATIONAL NEWS),गरियाबंद
नक्सल प्रभावित इलाकों में जहां आमतौर पर जंगल की खामोशी और बंदूक की गूंज सुर्खियां बनती है, वहीं इस बार सीआरपीएफ की 211 बटालियन ने “गोली नहीं, गिफ्ट” वाली रणनीति अपनाकर ग्रामीणों को चौंका दिया। थाना शोभा क्षेत्र के ग्राम पंचायत शोभा और आसपास के गांवों में 25 फरवरी 2026 (बुधवार) को सिविक एक्शन कार्यक्रम आयोजित कर सुरक्षा बलों ने विकास का एक अलग ही “सॉफ्ट अटैक” किया।

शासकीय प्राथमिक कन्या आश्रम शाला, शोभा, जिला–गरियाबंद (छत्तीसगढ़) के खेल मैदान में आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता विजय प्रताप (कमांडेंट, 211 बटालियन, के.रि.पु.बल), रंजन कुमार बहाली (द्वितीय कमान अधिकारी), इकबाल अहमद (उप कमांडेंट), डॉ. देविनेनि तपस्विनी (चिकित्सा अधिकारी) तथा संतोष कुमार (सहायक कमांडेंट) द्वारा की गई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में संजय नेताम (जिला पंचायत सदस्य, मैनपुर डिवीजन) उपस्थित रहे। साथ ही ज्ञानेश्वर सिंह गंगवार (थाना प्रभारी, शोभा), धनश्याम मरकाम (सरपंच, ग्राम पंचायत शोभा), नरवती नेताम (सरपंच, ग्राम पंचायत गोना), फूलमती नेताम (सरपंच, ग्राम पंचायत अड़गड़ी), चुनीलाल नेगी (प्रधानाचार्य, शासकीय प्राथमिक कन्या आश्रम शाला, शोभा), शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण महिला, पुरुष और बच्चे मौजूद रहे।
शोभा मै अचानक जब सीआरपीएफ की गाड़ियों से जवान उतरे, तो ग्रामीणों ने पहले पल भर को सोचा कहीं सर्च ऑपरेशन तो नहीं… लेकिन जब गाड़ियों से स्टील के बर्तन, सोलर लाइट और क्रिकेट बैट निकलने लगे, तो माहौल का “टेंशन” तुरंत “फेस्टिवल मोड” में बदल गया।
कार्यक्रम के दौरान जरूरतमंद ग्रामीणों को बाल्टी, गिलास, प्लेट, कंबल, साड़ी, लुंगी और सोलर लाइट जैसे आवश्यक घरेलू सामान वितरित किए गए। ऐसा लगा मानो जंगल के बीच एक मिनी “जनकल्याण मॉल” खुल गया हो, जहां बिना बिल और बिना लाइन के जरूरतमंदों तक राहत पहुंच रही हो।

बच्चों के चेहरे पर असली खुशी तब देखने को मिली जब उन्हें क्रिकेट बैट, बॉल,टी.वी, कैरम बोर्ड और स्कूल बैग दिए गए। जिन हाथों में कभी डर और अनिश्चितता थी, उन्हीं हाथों में अब बल्ला और किताब नजर आई—मानो भविष्य ने खुद आकर दस्तक दी हो।
इस अवसर पर कमांडेंट विजय प्रताप और अन्य अधिकारियों ने ग्रामीणों से सीधा संवाद कर उन्हें भरोसा दिलाया कि सीआरपीएफ केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि विकास और विश्वास के भी “फील्ड ऑफिसर” हैं। अधिकारियों ने ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया।
कार्यक्रम में ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों, आश्रम स्कूल के शिक्षकों और ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। ग्रामीणों ने खुलकर अपनी बातें रखीं और इस बार शिकायतों की जगह धन्यवाद की आवाज ज्यादा सुनाई दी—जो अपने आप में विश्वास बढ़ने का सकारात्मक संकेत है।

इस सिविक एक्शन कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को मुख्यधारा से जोड़ना और सुरक्षा बलों के प्रति विश्वास को मजबूत करना है। सीआरपीएफ ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि अब जंगलों में सिर्फ ऑपरेशन ही नहीं, बल्कि अवसर, सहयोग और विकास की रोशनी भी पहुंच रही है।

कुल मिलाकर, इस पहल ने यह साबित कर दिया कि कभी-कभी बदलाव की शुरुआत बंदूक की आवाज से नहीं, बल्कि एक सोलर लाइट, एक स्कूल बैग और एक भरोसेमंद संवाद से होती है। अब यह “विश्वास का अभियान” जंगल के अंधेरे में कितनी दूर तक रोशनी फैलाता है, यह आने वाला समय तय करेगा ।

