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5 साल से पेंशन के लिए भटक रही बुजुर्ग महिला, कागजों में जारी राशि जा रही किसी और के खाते में

बस्तर की माटी न्यूज़ (BKM NATIONAL NEWS), गरियाबंद 

सरकार की योजनाएं जरूरतमंदों तक पहुंचाने के लिए बनाई जाती हैं, लेकिन कई बार लापरवाही और व्यवस्था की खामियों के कारण असली हकदार ही दर-दर भटकने को मजबूर हो जाते हैं। ऐसा ही मामला गरियाबंद जिले के अमलीपदर गांव से सामने आया है, जहां एक बुजुर्ग महिला पिछले पांच साल से अपनी ही वृद्धा पेंशन के लिए भटक रही है।

अमलीपदर कुर्ला पारा की रहने वाली पोतनी बाई यादव नाम की बुजुर्ग महिला को वृद्धा पेंशन योजना का लाभ मिलना चाहिए, लेकिन कागजों में पेंशन जारी होने के बावजूद यह राशि किसी अन्य महिला के बैंक खाते में पहुंच रही है।
पति और बेटे के सहारे के बिना जिंदगी पहले ही कठिन हो चुकी है। कई साल पहले बेटे की मौत के बाद पूरे परिवार की जिम्मेदारी इस बुजुर्ग महिला के कंधों पर आ गई। वह अपनी बहू के साथ जैसे-तैसे घर का गुजारा कर रही है। वहीं दूसरा बेटा भी उनसे अलग रहने लगा है, जिससे मां और बहू को अलग से खाना बनाकर रहने को मजबूर होना पड़ रहा है।
सरकार की योजना के तहत महिला के नाम पर प्रधानमंत्री आवास भी स्वीकृत हुआ था, लेकिन वह आज तक अधूरा पड़ा हुआ है। मजबूरी ऐसी है कि बुजुर्ग महिला आज भी झुग्गी-झोपड़ी में खाना बनाकर अपना जीवन गुजार रही है।
अपनी परेशानी को लेकर महिला ने कलेक्टर के नाम पर तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है। सबसे हैरानी की बात यह है कि पिछले पांच साल से महिला की पेंशन गांव की ही एक अन्य महिला के खाते में जा रही है, लेकिन अब तक न तो विभाग ने और न ही किसी जिम्मेदार अधिकारी ने इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई की है।


बुजुर्ग महिला को ठीक से सुनाई भी नहीं देता और वह अक्सर बीमारी से भी जूझती रहती है। बावजूद इसके न तो परिवार के अन्य सदस्य और न ही सरकारी महकमा उसकी पीड़ा को समझ पा रहा है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इस बुजुर्ग महिला को उसके हक की वृद्धा पेंशन कब मिलेगी?
क्या हर गरीब को न्याय पाने के लिए कलेक्टर कार्यालय तक पहुंचना जरूरी है?
और आखिर कब प्रशासन इस पूरे मामले की जांच कर सही लाभार्थी तक योजना का लाभ पहुंचाएगा?

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